‘शिवलिंग’ की कार्बन डेटिंग पर सुनवाई आज, वाराणसी जिला अदालत सुना सकती है बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ  
ज्ञानवापी मामले को लेकर वाराणसी की जिला अदालत आज फैसला सुनाएगी। मामले में 5 महिलाओं की तरफ से कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका के जरिए 'शिवलिंग' की कार्बन डेटिंग के लिए अदालत के हस्तक्षेप की मांग की गई है। कार्बन डेटिंग कोर्ट के आदेश पर किए गए वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर मिली थी। जिसे हिंदू पक्ष शिवलिंग मान रहा है। हिंदू याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान "वज़ूखाना" के पास एक "शिवलिंग" पाया गया था, जो मस्जिद के अंदर बने छोटे से जलाशय के पास मिला है। इस जलाशय का प्रयोग मुस्लिम भक्तों की तरफ से नमाज से पहले हाथ-मुंह धोने के लिए किया जाता है।
 
हालांकि, पिछली सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद ने कार्बन डेटिंग और शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच की मांग का कड़ा विरोध किया था। सुनवाई को दौरान AIM के वकील ने कहा था कि "सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई का इसे बचाने का आदेश दिया था, ऐसे में इस तरह के ढांचे को तोड़ा नहीं जा सकता। AIM की दलील का विरोध करते हुए मामले में वादी 2 से 5 के वकील विष्णु जैन ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले से संबंधित सभी आवेदनों को निपटाने के लिए अपने 20 मई के आदेश के माध्यम से वाराणसी जिला न्यायाधीश को अधिकार दिया था। हालांकि, इसके बाद सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 14 अक्टूबर को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
 
मामले में एआईएम के वकील अखलाक अहमद ने कहा था कि हमने कार्बन डेटिंग की मांग और संरचना की वैज्ञानिक जांच की मांग के खिलाफ मंगलवार को अदालत के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। वहीं, 17 मई के अपने आदेश में, SC ने संरचना की रक्षा करने के लिए कहा था। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा था कि मूल मामला श्रृंगार गौरी की पूजा के बारे में है। मस्जिद की संरचना से इसका कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में न तो पुरातत्व विभाग द्वारा कोई जांच की जा सकती है और न ही वैज्ञानिक जांच कराकर कोई कानूनी रिपोर्ट मांगी जा सकती है।

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