रायपुर
विशुद्ध देशना मंडप में जारी अंतर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के कार्यक्रम का शुभारंभ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति बलदेव भाई शर्मा ने किया। उन्होंने आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज एवं मुनिराजों को प्रणाम करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि आचार्यश्री की उपस्थिति में एक ऐसे ग्रंथ पर चर्चा कर रहे हैं जो वास्तव में विश्व कल्याण का मार्ग दिखाता है। एक नई दृष्टि जीवन जीने की कला, जीवन का अर्थ,जीवन सम्यक मार्ग, हम सबके सामने उपस्थित करता है। ऐसा वस्तुत्व महाकाव्य अद्भुत रचना है, आत्मा को पावन करने वाला ग्रंथ है। आज भौतिकता के दौर में तत्व ज्ञान की चर्चा करना बड़ा दुर्लभ हो गया है।
पूज्य आचार्यश्री के आशीर्वाद से यह हमको अवसर मिल रहा है और अनेक स्थानों के बड़े-बड़े विद्वान यहां उपस्थित हैं। यह जो वस्तुत्व शब्द है ये बड़ा गहन है, पहली नजर में लगता है पता नहीं दूसरा अर्थ क्या होगा ? पाश्चात्य जगत ने दुनिया को एक सिद्धांत दिया पदार्थ ही सर्वोपरि है। ये जीवन उन पदार्थों का अधिकाधिक उपभोग करने के लिए है। पश्चिम की दृष्टि ने आज मनुष्य को परस्पर संघर्ष, स्वार्थ और टकराव के मुहाने पर ले जाकर विनाश की ओर अग्रसर किया है, लेकिन पूज्य आचार्यश्री ने वस्तुत्व की जो व्याख्या की है,वो भारतीय चिंतन परंपरा में,ये जो पदार्थ है,ये केवल उपभोग के लिए नहीं है,पदार्थ की मीमांसा त्यागमयी जीवन में है, अपरिग्रह में है। हमारे जैनाचार्यों ने सम्यक दृष्टि,सम्यक बुद्धि ,सम्यक ज्ञान, एक जो जीवन का सम्यक रूप प्रस्तुत किया, वास्तव में वस्तुत्व उसका समुच्चय है। जिसने वस्तुत्व के अर्थ को समझ लिया उसका जीवन वैराग्य पूर्ण, त्याग पूर्ण, लोक हितकारी,इस प्रकार की दृष्टि से युक्त हो जाता है।
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