ढाका
बांग्लादेश तट पर मंगलवार को चक्रवाती तूफान ने दस्तक दे दी। इससे यहां 9 लोगों की मौत हो गई। तूफान इतना शक्तिशाली था कि पेड़ उखड़ गए, कई मकान ढह गए, सड़कें ध्वस्त हो गई। यहां तक कि संचार नेटवर्क भी क्षतिग्रस्त हो गया। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। चक्रवाती तूफान सितरंग (Cyclone Sitrang) के कारण पश्चिमी तट पर भूस्खलन हुआ। गनीमत है कि इससे पहले यहां से लोगों को निकाल लिया गया था।
बंगाल की खाड़ी से उठा 'सितरंग'
चक्रवात सितरंग बंगाल की खाड़ी से शुरू हुई। तेज तूफान सितरंग के कारण 88 kph (55 mph) की तेजी के साथ हवा चल रही थी। पेड़ों के गिरने से अधिकांश लोगों की जान चली गई। दक्षिणपूर्व बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में किसी तरह की बड़ी क्षति की खबर नहीं है। बता दें कि इन शिविरों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी हैं जो पड़ोसी देश म्यांमार से यहां आएं हैं।
जोखिम वाले इलाकों में रोहिंग्या शरणार्थियों को दी गई थी चेतावनी
बाढ़ के खतरे वाले इलाकों में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को तूफान को देखते हुए एहतियातन शिविरों के भीतर ही रहने की सलाह जारी की गई थी। राजधानी की सड़कों पर भारी बारिश हुई जिसके कारण पूरे इलाके में बाढ़ के हालात बन गए। आवागमन में परेशानी हुई। इस तूफान से पश्चिम बंगाल के पूर्वी इलाके भी नहीं बचे। पिछले कुछ सालों से मौसम के कारण दक्षिण एशिया में व्यापक पैमाने पर नुकसान हुआ है। पर्यावरणविदों ने चेताया कि जलवायु परिवर्तन से यहां अधिक क्षति होगी, विशेषकर बांग्लादेश के जनसंख्या बहुल इलाकों में इसका काफी असर होगा।
ActionAid ग्रुप के बांग्लादेश निदेशक फराह कबीर ने बताया कि साल 2022 में जलवायु परिवर्तन को लेकर आपात स्थितियां जैसे बाढ़ व सूखा के कारण व्यापक स्तर पर खराब हालात दिखे। ऐसे हालात पहले कभी नहीं दिखे थे। उन्होंने कहा, 'जलवायु संकट बढ़ रहा है और यहां बांग्लादेश में इसके कारण बनी विकट परिस्थिति का अहसास हम कर सकते हैं। इस संकट से उबरने के लिए हमें तुरंत फंड की आवश्यकता है।'
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