लंदन
ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बनते ही ऋषि सुनक एक्टिव मोड में आ गए हैं. उनकी तरफ से कैबिनेट में बड़े बदलाव कर दिए हैं. इन बदलावों ने कई बड़े संकेत दे दिए हैं. सुनक ने अपनी निजी पसंद को पीछे छोड़ते हुए कई ऐसे चेहरों को जगह दी है जो उन्हें छोड़कर दूसरों के वफादार रहे हैं. ऐसे में अपनी कैबिनेट में सुनक ने संतुलन साधने का प्रयास किया है. संकेत दिया गया है कि वे सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, सभी के साथ मिलकर ब्रिटेन का विकास करना चाहते हैं.
सुएला की वापसी, क्या मायने?
ऋषि सुनक की कैबिनेट में वैसे तो कई बड़े चेहरों को जगह दी गई है लेकिन जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा वो सुएला ब्रेवरमैन का नाम रहा. वैसे तो सुएला भारतीय मूल की हैं लेकिन कुछ दिन पहले उन्होंने ही भारतीयों के लिए एक विवादित टिप्पणी कर दी थी. उन्होंने कहा था कि कई भारतीय प्रवासी वीजा की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी ब्रिटेन में ही रहते हैं. ब्रिटिश लोगों ने ब्रेग्जिट से हटने के लिए इसलिए वोट नहीं दिया था कि भारतीयों के लिए ब्रिटेन की सीमा इस तरह से खोल दिया जाए. लेकिन सुनक ने अपनी कैबिनेट में उनकी वापसी करवा दी है. उन्हें एक बार फिर गृहमंत्री का पद दे दिया गया है.
डिप्टी पीएम कौन बना है?
इसी तरह सुनक ने अपनी कैबिनेट में जेम्स क्लेवर्ली को भी जगह दी है. वे इससे पहले ट्रस के मंत्रिमंडल में भी शामिल थे, अब सुनक ने भी उन पर भरोसा जताया है. उन्हें एक बार फिर विदेश सचिव नियु्क्त किया गया है. अब अगर जेम्स को मौका दिया गया है तो बोरिस जॉनसन की सरकार के समय डिप्टी पीएम रहे डोमिनिक राब एक बार फिर अपना वही पद हासिल करने में कामयाब हो गए हैं. सुनक की सरकार में भी वे डिप्टी पीएम की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं. उन्हें न्याय सचिव की भूमिका भी दी गई है. इसी तरह बेन वैलेस ने भी अपना रक्षा सचिव वाला पद बचा लिया है. सुनक ने भी अपनी कैबिनेट में उन्हें बरकरार रखा है.
बड़े चेहरे जो बाहर हो गए
अब ये तो वो चेहरे हैं जिन्हें सुनक की कैबिनेट में जगह दी गई है. लेकिन कई ऐसे पुराने नाम भी हैं जिन्हें इस बार बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. इस लिस्ट में बिजनेस सेक्रेटरी जैकब रीस-मोग, जस्टिस सेक्रेटरी ब्रैंडन लुईस, वर्क एंड पेंशन सेक्रेटरी क्लो स्मिथ के नाम प्रमुख हैं. वहीं भारतीय मूल के आलोक कुमार भी अपना पद नहीं बचा पाए हैं. लेकिन जिन भी चेहरों को जगह दी गई है, उसे देख जानकार मान रहे हैं कि ऋषि सुनक अपने प्रधानमंत्री रहते हुए पार्टी को एकजुट रखना चाहते हैं. जो भी अंदरूनी विवाद चल रहे हैं, गुट बने हुए हैं, वे उन्हें समाप्त कर अपने कैबिनेट में साथ लाना चाहते हैं.
आसान नहीं था सुनक का पीएम बनना
वैसे सुनक का ये प्रधानमंत्री बनने का सफर भी खासा चुनौतियों से भरा रहा है. असल में सबसे पहले बोरिस जॉनसन ने पीएम पद की कमान संभाली थी. 2019 में उन्हें ही जनादेश मिला था. लेकिन विवादों से जॉनसन का ऐसा नाता रहा कि उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ गया. इसके बाद लिज ट्रस को ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनाया गया था. उन्होंने ऋषि सुनक को एक अच्छे अंतर से हराकर वो कुर्सी हासिल की थी. लेकिन उनके कुछ फैसलों पर ऐसा बवाल रहा कि वे सिर्फ 45 दिनों तक ही प्रधानमंत्री बनी रह पाईं. असल में टैक्स कटौती के लिज ने कुछ ऐसे वादे कर दिए थे जो वर्तमान में आर्थिक चुनौतियों की वजह से पूरे नहीं हो सकते थे. ऐसे में उनको अपने ही लिए कुछ फैसले वापस लेने पड़ गए. इसी वजह से दोनों जनता और पार्टी के कई नेताओं ने खुद को ठगा हुआ सा महसूस किया. उन्हें लगने लगा कि लिज को जिन वादों के दम पर सत्ता दी गई थी, वे उन्हें ही पूरा नहीं कर पाईं. इसी वजह से उनके इस्तीफे की मांग उठने लगी थी जो उन्होंने 19 अक्टूबर को दे भी दिया. उस इस्तीफे के बाद ही सुनक के प्रधानमंत्री बनने की राह खुली और एक भारतीय मूल के शख्स ने ब्रिटेन की बागडोर संभाल ली.
सुनक ने लोगों को क्या संदेश दिया
अब पीएम बनते ही सुनक ने कहा है कि मैं जिस सरकार का नेतृत्व करूंगा, उसके हर स्तर पर ईमानदारी, व्यावसायिकता और जवाबदेही होगी और मैं दिन-रात काम करूंगा. मैं आपसे हमारी समस्याओं को ठीक करने में मदद करने का अवसर मांग रहा हूं. अब हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे और भी बड़ी हैं. मेरे पास डिलीवरी का ट्रैक रिकॉर्ड है, हमारे सामने सबसे बड़ी समस्याओं को ठीक करने की एक स्पष्ट योजना है और मैं 2019 के घोषणापत्र के वादे को पूरा करूंगा.
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