सुखद :राजस्थान में बेटियों का जन्म लिंगानुपात 888 से बढ़कर 947 हुआ

देश

जयपुर
 कुछ वर्ष पहले तक बेटियों की कमी से जूझ रहे राजस्थान की तस्वीर अब बदल रही है। जो तस्वीर बदली है, वह सुखद है। इस नए राजस्थान मेे बेटियां खूब जन्म ले रही हैं और खूब फल-फूल रही हैं। राज्य में लिंगानुपात दस वर्षों में 59 अंकों का सुधार हुआ है। साल 2011 में 1000 बालकों पर 888 बालिकाओं ने जन्म लिया था, साल 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 947 हो गया है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। देश में जन्म के समय लिंगानुपात 937 है जबकि राजस्थान में 947 है। केंद्र सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढाओ अभियान को इसका कारण बताती रही है जबकि राज्य सरकार अपनी योजनाओं को। कारण जो भी हो, लेकिन बदलाव सकारात्मक हुए हैं।

इन कारणों से बदली तस्वीर

1. जागरुकता : समाज में बेटियों के प्रति जागरुकता बढ़ी है। शहरी क्षेत्र में कई ऐसे परिवार भी जहां केवल एक ही बच्चा है, वह भी लड़की। दम्पत्ति स्वेच्छा से दूसरा बच्चा पैदा नहीं करना चाहते।

2. लड़कियों का हर क्षेत्र में आगे आना : न केवल शहरी क्षेत्र में बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियां पढ़-लिख रही हैं। नौकरीपेशा लड़कियों की संख्या बढ़ी है। पढ़ाई के साथ खेल-कूद में बालिकाएं अधिक संख्या में आगे आई हैं।

3. बाल विवाह घटना व शादी की औसत आयु बढ़ना : समाज में शादी की औसत आयु में बढ़ोतरी हुई है। बाल विवाह की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। साल 2015-16 में जहां राज्य में 35 फीसदी महिलाओं (18-24 वर्ष की) की शादी 18 साल की आयु से पहले हुई, अब 2021 में यह आंकड़ा गिरकर 25 फीसदी रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार विवाह की उम्र बढ़ने से बच्चों के पैदा होने की संख्या घटी है।

4. बेटी जन्म पर भी कुंआ पूजन : बेटे की तरह बेटी के जन्म पर भी कुंआ पूजन की रस्म आजकल लोग कर रहे हैं। इससे भी जागृति बढ़ी है।

.. और सरकार ने किए ये प्रयास

1. डिकॉय ऑपरेशन : राज्य सरकार ने भ्रूण हत्या को रोकने के लिए साल 2016 से 2019 के बीच खूब डिकॉय ऑपरेशन किए। इनके कारण भी भ्रूण हत्या में तेजी से गिरावट आई और बेटियों ने जन्म लिया।

2. बेटियों के लिए चलाई योजनाएं : बेटियों के लिए बेटी जन्मोत्सव, मुख्यमंत्री राजश्री योजना, ब्रांड एंबेसेडर, बेटी बचाओ की शपथ, अपना बच्चा-अपना विद्यालय, बेटी के जन्म पर पौधरोपण, कलक्टर क्लास सहित कई पहल की।

बात यदि राजस्थान में बेटिंयों के लिंगानुपात की बदली तस्वीर की करें तो जागरूकता, बाल विवाह घटना व शादी की औसत आयु बढ़ना,बेटियों के लिए चल रही सरकार की योजनाओं और वही हर क्षेत्र में लड़कियों को स्थान दिया जाना इसका कारण है।

एक नजर लिंगानुपात पर डाले तो लिंगानुपात की स्थिति
स्थान ::::: वर्ष 2011 ::::2015-16 :::: 2017-18 :::: अब
राजस्थान :: 888 :::: 929 ::::::944 ::::::: 947
देश :::::::::: 943 ::::: 923 ::::::: 929 :::::: 937

इस तरह बढ़ा लिंगानुपात
जिला — 2020-21 — 2021-22 — अंतर
अजमेर — 952 —— 943 ——- (-9)
अलवर — 933 —— 936 ——- 3
बांसवाड़ा — 965 —– 1005 —— 40
बारां ——- 949 —– 913 — (-36)

 

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