2 नवंबर को गुजरात में रहेगा राजकीय शोक,आज मोरबी जायेंगे प्रधानमंत्री मोदी

देश

नई दिल्ली
 गुजरात के मोरबी में सस्पेंशन ब्रिज (Gujarat Bridge Collapse) टूटने के हादसे में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और मौत का आंकड़ा भी बढ़ गया है। इस दुखद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार की शाम गांधीनगर में हाईलेवल मीटिंग बुलाई थी। जिसमें उन्होंने घटना में घायल पीड़ितों को हर संभव मदद देने का ऐलान किया है। केवल इतना ही नहीं इस दौरान पीएम मोदी ने 2 नवंबर को पूरे राज्य में राजकीय शोक मनाने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान पूरे राज्य के सरकारी कार्यालय, स्कूल, इत्यादि में देश का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इस बैठक में गुजरात के सीएम भूपेंद्र भाई पटेल, राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी और चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे और इस बारे में विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही, हादसे की जांच के लिए SIT टीम भी गठन कर दिया गया है।

 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कुल 141 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है और यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है। जिस समय यह हादसा हुआ उस समय 600 लोग घटनास्थल पर मौजूद थे क्योंकि छठ पूजन के लिए इस पुल को आम जनों के लिए खोल दिया गया था। बता दें कि इस पुल पर लोगों को जाने के लिए प्रशासन से टिकट खरीदना पड़ता है। वहीं, हादसे के बाद मौके पर राहत व बचाव की टीम पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी गई है। घटना की सूचना मिलते ही, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मोरबी पहुंच गए हैं और घटनास्थल का निरीक्षण करने के अलावा उन्होंने अस्पताल में जाकर घायलों को दी जा रही व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया है।

 

यह भी बताया जा रहा है कि जिस समय हादसा हुआ उस वक्त पल पर क्षमता से अधिक भीड़ थी। पैसा कमाने के चक्कर में फुल प्रबंधन ने इस बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया कि पुल पर कितने लोगों को भेजा जा सकता है। इसके अलावा तकनीकी दिक्कत होने की बात भी कही जा रही है। यह हादसा कैसे हुआ और किस वजह से हुआ इस बात की जानकारी गठित की गई एसआईटी एकत्रित करेगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस हादसे के कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रविवार होने की वजह से और छठ पूजन होने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने करने के लिए आए थे। वहां मौजूद कुछ शरारती तत्व पुल को हिला रहे थे जिसकी शिकायत प्रबंधन को दी गई थी लेकिन प्रबंधन की ओर से इस बारे में कोई भी एक्शन नहीं लिया गया। जिसके चलते पुल टूट गया। हालांकि, यह बात कितनी सच है इसकी पुष्टि कर पाना मुश्किल है।

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