अब फिल्म और टीवी धारावाहिकों की समीक्षा करेगा धार्मिक सेंसर बोर्ड ,शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का ऐलान

मध्य प्रदेश राज्य

जबलपुर

 अब धर्माचार्य और हिन्दू धर्म के जानकार फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में हिन्दू धर्म के अपमान से जुड़ी सामग्री की समीक्षा करेंगे. इसके लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धार्मिक सेंसर बोर्ड बनाने जा रहे हैं, जो जल्द ही अपना काम शुरू कर देगा. उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्मों में जहां कोई कमी दिखानी हो तो हिन्दू धर्म और जहां अच्छी दिखानी हो तो दूसरे धर्म के जिक्र की परिपाटी चली आ रही है और अब इसे खत्म करना है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जबलपुर में कहा कि बॉलीवुड में बनाई जा रही फिल्मों और सीरियल्स में हिंदू-देवी देवताओं का लगातार अपमान किया जा रहा है.

दशकों से हो रहा हिंदुत्व का अपमान- शंकराचार्य
हिन्दू धर्म के अपमान का यह सिलसिला भारत में कई दशकों से बॉलीवुड चला रहा है. हिंदू और हिंदुत्व पर निशाना साधकर फिल्म बनाने का काम लंबे समय से किया जा रहा है. अब जनता जागरूक हो गई है, धर्माचार्य भी इस विषय पर ध्यान देने लगे हैं. इसलिए अब उन्होंने फैसला किया है कि जिस तरह से सेंसर बोर्ड काम करता है, उसी तरह से फिल्मों को जांचने के लिए एक धार्मिक समिति का भी गठन किया जाएगा.

इसमें हिंदू धर्म के जानकार और विद्वानों को रखा जाएगा. यह समिति फिल्म और सीरियल्स को देखेगी. अगर उसमें किसी भी तरह से हिंदू धर्म पर निशाना साधने जैसे तथ्य मिले तो फिर फिल्म निर्माताओं को नोटिस भेजकर उसमें सुधार करने को कहा जाएगा.

बॉलीवुड इंडस्ट्री को दी चेतावनी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को दो टूक में चेतावनी दी है कि हिंदू धर्म के देवी-देवताओं का अपमान बंद होना चाहिए. इसके साथ ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने शंकराचार्य की नियुक्ति पर सवाल उठाने वाले अखाड़ों को भी खरी-खरी सुनाई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ब्रम्हलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज के आदेश के मुताबिक ही शंकराचार्यों की नियुक्ति हुई है. इसमें पूरी तरह से धर्म और शास्त्र के नियमों का पालन किया गया है.

शंकराचार्य की नियुक्ति पर सवाल उठाने वाले एक अखाड़े के कुछ लोग हैं जिन्हें किसी भी तरह का ज्ञान नहीं है. शंकराचार्य की नियुक्ति में कभी भी अखाड़े शामिल नहीं होते हैं. अब शंकराचार्य की नियुक्ति सर्वसम्मति से हो चुकी है और सवाल उठाने वालों का तर्क निराधार है.

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