तीन हिंदू बच्चों को मुस्लिम बनाने का मामला: पुलिस को अब तक नहीं भेजी गई रिपोर्ट

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल
रायसेन जिले के गौहरगंज में माता-पिता से पिछड़े तीन बच्चों को मुस्लिम बनाए जाने के मामले में पुलिस को अब तक जिला प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार है। इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति को अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस को देना है। जिसके आधार पर पुलिस प्रकरण दर्ज कर सकेगी।

इस मामले में सुर्खियों में आने के बाद रायसेन जिला प्रशासन के इस मामले से जुड़े सभी विभाग अपना पल्ला झाड़ने में लग गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी एमएल राठौरिया ने कहा कि इस मामले की जांच उनके विभाग से जुड़ी हुई नहीं है। यह जांच बाल कल्याण समिति या महिला बाल विकास विभाग करेगा। जबकि इस मामले में बच्चों का स्कूल में दाखिला मुस्लिम नामों से किया गया है। इस मामले में राठौरिया ने कहा कि यह स्कूल की जांच का विषय नहीं है। बच्चों का दाखिले में जो नाम बताया गया वह लिख कर उनका एडमिशन कर दिया गया।  

दूसरी ओर एनसीपीसीआर के चेयनमैन प्रियंक कानूनगो बच्चों के पिता को तलाशेंगे। यह मामला कानूनगो ने ही उठाया था। इसके बाद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन हरकत में आया। कानूनगो मंगलवार को दिल्ली पहुंचकर रायसेन के जिला प्रशासन से इस मामले पर जबाव-तलब करेंगे। बच्चों के पिता दमोह में रहते हैं।

भोपाल से रायसेन तक होती रही अनदेखी
बच्चों के मामलों में भोपाल से लेकर रायसेन जिले तक अनदेखी की गई। बच्चों को एक व्यक्ति भोपाल के एक अनाथालय में छोड़ कर चला गया था, जहां से बच्चों को भोपाल जिले की बाल कल्याण समिति को दिए गए। यहां की समिति को बच्चों ने बताया कि वे मंडीदीप के रहने वाले हैं, तो समिति ने तत्काल उन्हें रायसेन बाल बल्याण समिति के हवाले कर दिया। रायसेन की समिति ने इन्हें गौहरगंज के गोदी शिशु गृह भेज दिया। जहां पर नवजीवन सामाजिक संस्था के संचालक हसीन परवेज ने इन बच्चों के नाम मुस्लिम बता कर आधार कार्ड बनवा दिए और स्कूल में दाखिला करवा दिया।

महिला बाल विकास और बाल आयोग ने अब तक नहीं दी जांच रिपोर्ट
इधर एसपी विकास सहवाल ने कहा कि इस मामले में पुलिस स्वयं संज्ञान नहीं ले सकती है। पुलिस को इंतजार है महिला बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट का। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में पुलिस आगे की कार्यवाही करेगी। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों से जुड़ा मामला होने के चलते उनके मां-पिता के पास छोड़ने की जिम्मेदारी बाल कल्याण समिति की होती है।

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