जबलपुर
जबलपुर रेलवे प्लेटफार्म और ट्रेन में अवैध वेंडर द्वारा बेची जाने वाली खानपान की सामग्री की गुणवत्ता हमेशा संदेह के घेरे में रहती है. तमाम शिकायतों के बाद रेलवे भी इस ओर अंकुश नहीं लगा पाया लेकिन अब जबलपुर के एक एनजीओ ने अवैध वेंडरों के खिलाफ हाई कोर्ट की शरण ली है. अवैध वेंडर्स के द्वारा बेची जाने वाली दूषित खाद्य सामग्रियों को लेकर इस एनजीओ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है.
हाई कोर्ट ने चार हफ्तों में मांगा जवाब
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया कि पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर के प्लेटफार्म में अवैध वेंडर्स की भरमार है. ये अवैध वेंडर्स बेधड़क रेलवे प्लेटफार्म पर यात्रियों को दूषित खाद्य सामग्री बेच रहे हैं, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. रेलवे को शिकायत करने के बावजूद भी अवैध वेंडर्स पर लगाम नहीं लगा पा रहा है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क दिया कि अवैध वेंडर्स द्वारा गुणवत्ताविहीन खाद्य सामग्री बेचने से यात्रियों की सेहत पर असर पड़ रहा है, जबकि नियम यह है कि रेलवे प्लेटफार्म पर केवल वैध वेंडर ही खाद्य सामग्री बेच सकते हैं. हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद पश्चिम मध्य रेलवे, डीआरएम जबलपुर और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं.
जबलपुर रेल मंडल ने किया 368 व्यक्तियों को गिरफ्तार
हालांकि, जबलपुर रेल मंडल में एक महीने के दौरान अनाधिकृत रूप से खाद्य सामग्री बेचने और भीख मांगने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई. इस दौरान कुल 368 मामलों में अपराध पंजीबद्ध करते हुए 368 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया. इनके खिलाफ रेल अधिनियम की धारा 144 के अंतर्गत कार्यवाही की गई.
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