Poland में मिसाइल हमले से बढ़ रहा तनाव, Biden ने बुलाई G7 देशों की इमरजेंसी बैठक

दुनिया

न्यूयोर्क
 अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने परामर्श के लिए इंडोनेशिया में जी7 और नाटो नेताओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।

जानकारी हो कि रूस ने यूक्रेन पर मिसाइल से कई हमले किए जिसमें में कुछ मिसाइल पोलैंड में जा गिरा। ऐसे में नाटो-सहयोगी पोलैंड ने कहा है कि "रूसी निर्मित" मिसाइल ने यूक्रेन सीमा के पास अपने देश के पूर्वी हिस्से में दो लोगों को मार डाला है। यह रिपोर्ट एपी की बताई जा रही है।

वहीं नाटो की आपात बैठक बुलाए जाने के बाद पोलैंड ने 'मिसाइल' घटना पर रूसी दूत को तलब किया है। कहा जा रहा है कि रूस के मिसाइल वाली घटना अगर सही साबित होती है तो ये युद्ध अब अलग रूख अख्तियार कर सकता है। क्योंकि पोलैंड पर हमले का मतलब नाटो क्षेत्र में रूस ने जंग छेड़ दिया है। पोलैंड नाटो का मेंबर है और नाटो सदस्य रूस की इस गलती को माफ नहीं करेंगे।
 
अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने उनको अमेरिका के पूरे समर्थन का वादा किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस मामले की जांच के लिए पोलैंड को अमेरिकी समर्थन और सहायता का वादा करने के साथ ही नाटो संगठन के लिए अमेरिका की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की. पोलैंड में मिसाइल गिरने की घटना के बाद जी7 के नेता एक आपात बैठक पर सहमत हो गए हैं. जो बाइडन ने कहा कि ‘मैंने पूर्वी पोलैंड में जनहानि के लिए अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करने के लिए पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा से बात की और पोलैंड द्वारा विस्फोट की जांच के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने की पेशकश की. जैसे-जैसे यह आगे बढ़ेगी हम अगले कदम को तय करने के लिए निकट संपर्क में रहेंगे.’ बहरहाल पोलिश राष्ट्रपति डूडा ने कहा है कि इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि देश के पूर्वी हिस्से में गिरा रॉकेट किसने दागा था. अब इस घटना की जांच में अमेरिका के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे.

उधर पोलिश विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि गिरी हुई मिसाइल रूस में बनाई गई है. जबकि पोलैंड के राष्ट्रपति डूडा इसके बारे में अपने बयान में अधिक सतर्क थे. उनका कहना था कि अधिकारियों को निश्चित रूप से यह नहीं पता था कि इसे किसने दागा है या इसे कहां बनाया गया. उन्होंने कहा कि शायद सबसे ज्यादा आशंका है कि ये एक रूस में बनी मिसाइल थी. लेकिन अभी भी इसकी पुष्टि की जा रही है. अगर इसकी पुष्टि होती है, तो यूक्रेन के हमले के बाद यह पहली बार होगा जब किसी नाटो देश पर रूसी हथियार गिरा है. गौरतलब है कि नाटो गठबंधन की नींव यह सिद्धांत है कि एक सदस्य के खिलाफ हमला उन सभी पर हमला है.

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