रामपुर उपचुनाव में बदल रहे समीकरण, आजम के साथियों में क्यों जागा भाजपा प्रेम?

उत्तर प्रदेश राज्य

रामपुर 
आजम खान के रामपुर में उपचुनाव में समीकरण बदल रहे हैं। सत्ता के खौफ के बीच शहर के कुछ नामचीन और आजम के पुराने साथियों में भाजपा के प्रति प्रेम जाग गया है। यही वजह है कि कानूनी शिकंजे में फंसे कई ‘दागियों’ के लिए उप चुनाव में भाजपा ‘वैतरणी’ बन गई है। जिसमें डुबकी लगाकर वे सुकून से जिंदगी बसर करना चाहते हैं। यूं तो बीते कई दिन से रामपुर में काफी लोगों का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ते देखा जा रहा है लेकिन, रविवार और सोमवार को सियासी घटनाक्रम बहुत तेजी पकड़ गया। सपा के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान के भरोसेमंद एवं लंबे समय तक उनके मीडिया प्रभारी रहे फसाहत अली खां शानू ने भी आजम का साथ छोड़ दिया। उन्हें करीब से जानने वाले यही कह रहे हैं कि शानू पर सपा में रहते वक्त बहुत जुल्मो-ज्यादती हुई थी, अब वह राहत चाहते हैं, इसीलिए भाजपा के साथ चले गए।

शानू पर दर्ज हैं तमाम केस
फसाहत अली खां शानू ने अपनी सियासत की शुरूआत 1995 में कांग्रेस के गढ़ नूरमहल से जुड़कर शुरू की थी। वह 1997 में एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष और फिर मंडल प्रभारी बने। इसके बाद वह रालोद में चले गए। जहां 2003-04 में नगर अध्यक्ष रहे। वर्ष 2005 में वह आजम खान से जुड़ गए और फिर ऐसे जुड़े कि 17 साल सपा में आजम के वफादार बनकर रहे। पिछले दिनों तक वह सपा के जिला महासचिव थे। वह आजमवादी मंच के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। बीते 17 साल से फसाहत अली खां शानू आजम खां के मीडिया प्रभारी होने के कारण मीडिया में आजम का चेहरा रहे। आजम की घेराबंदी के दौरान शानू भी कानूनी शिकंजे में फंसते गए। बावजूद इसके वह पूरी ईमानदारी के साथ आजम खां से जुड़े रहे। उन पर भी कई मुकदमें इस बीच दर्ज हुए। 

जिलाबदर की अभी काटी थी सजा
पिछले दिनों उन्हें जिलाबदर भी किया गया। बीते 25 अक्तूबर को ही वह जिलाबदर की अवधि समाप्त होने के बाद रामपुर लौटे। इस बीच वह इतना टूटे कि आजम और सपा से मोहभंग हो गया। अतत: सोमवार को उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह के  नेतृत्व में भाजपा ज्वाइन कर ली। 

ताहिर ट्रैवेल्स के स्वामी ने भी किया है समर्थन
शहर के जाने वाले कारोबारी एवं ट्रांसपोर्टर और पूर्व में नगर पालिका परिषद रामपुर से सपा के चेयरमैन पद के प्रत्याशी रहे ताहिर अली ने भी भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना का समर्थन किया है। ताहिर अली के खिलाफ पिछले दिनों ही एआरटीओ ने मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कराया था। तब एसपी ने बाकायदा प्रेसनोट जारी कर ताहिर पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई करने की बात कही थी, जिसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। माना जा रहा है कि इस समर्थन के पीछे में राहत ही आस ही है।

यूसुफ के केस वापसी की तैयारी
आठ माह पूर्व कांग्रेस से सपा में गए और टिकट न मिलने पर फिर कांग्रेस ज्वाइन कर चमरौआ से विस चुनाव लड़े अली यूसुफ अली भी पिछले दिनों भाजपाई हो गए। अब इनके केस वापसी की प्रकिया शुरू हो गई है।

सपा से बागी हुए मशकूर
यह बात अलग है कि जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद मुन्ना ने न तो भाजपा ज्वाइन की है और ही भाजपा को समर्थन का ऐलान किया है लेकिन, जिस तरह से वह सपा में बगावत कर रहे हैं, उसे भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, मशकूर अहमद मुन्ना को भू माफिया घोषित किया जा चुका है। उनका केस हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, पोर्टल से उनका नाम हट जाए, वह इसकी कवायद में लगे हुए हैं।
 

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