गौतम गंभीर ने की भारतीय कोचों को मौका देने की वकालत, बोले- विदेशी कोच टीम को खराब कर सकते हैं

खेल

 नई दिल्ली 

भारत के पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने देश के कोचों की प्रशंसा की है और भारतीय क्रिकेट टीम के लिए भारतीय कोचों को नियुक्त करने की वकालत की है। गंभीर ने कहा कि भारतीय कोचों ने अतीत में खुद को साबित किया है। उन्होंने लाल चंद राजपूत का उदाहरण दिया, जिनके नेतृत्व में भारत ने 2007 में साउथ अफ्रीका में आयोजित पहला ICC T20 विश्व कप जीता था।

गंभीर ने विदेशी कोचों की आलोचना की और कहा कि वे भारतीय क्रिकेट को खराब कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "हां, हमें अपनी टीम के लिए विदेशी कोच नहीं चाहिए और न ही इसकी जरूरत है, वे सिर्फ आपकी क्रिकेट और टीम को खराब कर सकते हैं, भारतीय कोचों का क्या कसूर है? उन्होंने क्या गलत किया है? लाल चंद राजपूत की कोचिंग में हमने 2007 का टी20 वर्ल्ड कप जीता था।"

 भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका से जुड़ी त्रिकोणीय श्रृंखला में भारत की जीत के बारे में भी बात की, जब कोच के रूप में राजपूत टीम के साथ थे। गंभीर ने कहा, "हमने उसी कोच के साथ पहली बार ऑस्ट्रेलिया में सीबी सीरीज भी जीती थी, लेकिन हमें 2011 विश्व कप की जीत और कोच गैरी कर्स्टन याद हैं।" उन्होंने पिछले विदेशी कोचों के कोचिंग स्टेंट पर सवाल उठाया।
 

उन्होंने कहा, "डंकन फ्लेचर और जॉन राइट ने कौन-सा विशेष कार्य किया है? हमें अपने स्थानीय खिलाड़ियों और कोचों पर भरोसा दिखाना होगा।" उन्होंने ये भी कहा कि टी20 विश्व कप में हमें गेंदबाजों के योगदान को भी देखना होगा। गंभीर बोले, "हमें विश्व कप फाइनल में 97 और 91 रन बनाने वाले खिलाड़ियों को हमेशा क्यों याद रखना चाहिए। जहीर खान और हरभजन सिंह ने भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनका प्रयास बल्लेबाजों के बराबर था, इसलिए हमें उन्हें भी याद रखना होगा।"
 

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