भोपाल
मध्यप्रदेश में मध्यप्रदेश जन औषधि संघ के नाम से भ्रामक संघ गठित कर सस्ती और नकली दवाएं बेचने को लेकर ब्यूरो आफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग आफ इंडिया के महाप्रबंधक धीरज शर्मा द्वारा की गई शिकायत पर बागसेवनिया पुलिस ने खात्मा लगाने की तैयारी कर ली थी। जब भोपाल कोर्ट में यह मामला गया तो कोर्ट ने बागसेवनिया पुलिस के इस आवेदन को रिजेक्ट करते हुए कहा कि पुलिस ने इस मामले में पर्याप्त अनुसंधान नहीं किया है और यह जनता के स्वास्थ्य के खिलवाड़ से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने खारिजी आवेदन निरस्त करते हुए पुलिस को सभी बिंदुओं पर विधिवत जांच कर आगामी कार्यवाही करने के निर्देश दिए है।
ब्यूरो आफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग आफ इंडिया के महाप्रबंधक धीरज शर्मा ने पुलिस अधीक्षक भोपाल को शिकायत की थी कि गरीब और जरुरतमंद लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भारतीय फार्मा और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का ब्यूरो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत सोसायटी है यह प्रधानमंत्री जनौषधि परियोजना की एजेंसी है। उन्होंने शिकायत में कहा था कि मध्यप्रदेश जन औषधि संघ के भ्रामक नाम के साथ कुछ बेईमान संगठन चलाए जा रहे है और एक समानांतर व्यवस्था बी-82 एचआईजी विद्यानगर भोपाल में अपने कार्यालय से चला रहे है। आरोपी सोसायटी ने एक वेबसाईट भी बना रखी है जिसे भारत सरकार से संबंधित और राज्य के सहकारिता विभाग से संबंधित बताते हुए उस पर मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की तस्वीरे भी लगा रखी है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ बाग सेवनिया थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा420 तथा राष्टÑीय प्रतीक अधिनियम और आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कया गया था। आरोपी ने इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत याचिका लगाई थी जिसे निरस्त किया गया। इसके बाद भ्ज्ञी पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी का प्रयास नहीं किया। शिकायतकर्ता न्यायालय को बताया कि आरोपीगण ने बड़े पैमाने पर जनता के साथ धोखाधड़ी की है और अवैध संगठन के माध्यम से मुनाफा कमाया जा रहा है। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है इसके बावजूद आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस ने खारिजी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
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