लखनऊ
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में जातीय रैलियों पर रोक लगाने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त समेत प्रदेश के चार प्रमुख दलों भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा को नई नोटिसें जारी करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसम्बर को होगी।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। मामले की 11 नवंबर को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि वर्ष 2013 में ही नोटिसें जारी होने के बावजूद चारों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से कोई पेश नहीं हुआ है। इस पर न्यायालय ने नई नोटिसें जारी करने का आदेश दिया।
नोटिस में राजनीतिक दलों को बताना होगा कि राज्य में जाति आधारित रैलियों पर हमेशा के लिए पूर्ण प्रतिबंध क्यों नहीं लगा दिया जाना चाहिए। चुनाव आयोग को उल्लंघन के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए। याचिका दाखिल करने वाले शख्स ने कहा है कि राजनीतिक दलों की ऐसी गतिविधियों की वजह से कम संख्या वाली जातियां अपने ही देश में दोयम दर्जे की नागरिक बन गई हैं।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad

