रायपुर
राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संचालक श्री राजेश सिंह राणा ने कहा है कि शिक्षा की उपयोगिता तभी सिद्ध होगी जब हम उसे व्यवसाय से जोड़ेंगे। बच्चों में विभिन्न प्रकार के कौशलों का विकास करेंगे तो वे जब शिक्षा ग्रहण करने निकलेंगे तब उनके हाथ में रोजगार होगा। श्री राणा राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में व्यवसायिक शिक्षा पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यशाला में कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक के पाठ्यपुस्तकों में दिए गए विषयवस्तु को व्यवसाय से किस प्रकार संबद्ध किया जा सकता है, विषयवार उन कौशलों की पहचान करें जिन्हें बच्चों में विकसित किया जाना है। कार्यशाला का आयोजन शिक्षा को गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद हैदराबाद संस्थान और एससीईआरटी द्वारा किया गया।
श्री राजेश सिंह राणा ने कहा कि राज्य के छात्र-छात्राएं जीवन में बेहतर कार्य कैसे कर सकते हैं। उन्होंने व्यवसायिक शिक्षा की उपयोगिता और महत्ता बताई। श्री राणा ने कहा कि हमारी शिक्षा ऐसी हो जो समाज को एक बेहतर नागरिक देने का उद्देश्य को पूर्ण कर सके। शिक्षण पद्धति ऐसी होनी चाहिए जो न सिर्फ विषय आधारित हो अपितु विद्यार्थियों को रोजगार के नए-नए अवसर प्रदान कर सकें। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की संयुक्त संचालक निशी भांबरी ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा की हमारी शिक्षा ऐसी हो जो विद्यार्थियों को हेड,हार्ट और हैंड से जोड़े तथा रोजगार से जुड़कर एक सम्मानजनक जीवन जी सके। इस अवसर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद हैदराबाद की डॉ. योगिता मंडोले भी उपस्थित थी।
कार्यशाला में एससीईआरटी के अकादमिक सदस्यों द्वारा हिंदी, अंग्रेजी, गणित साइंस, सामाजिक विज्ञान विषयों में व्यवसायिक कौशल को चिन्हांकित किया गया, जिससे शिक्षक विषय पढ़ाते हुए विद्यार्थियों में विभिन्न कौशल जैसे लेखन, वक्ता, अभिनय, मूर्तिकला, काष्ठ कला, गीत, नृत्य, संगीत आदि कौशलों का विकास कर सकते है। जिससे विद्यार्थी व्यवसायिक कौशल के साथ साथ आर्थिक रूप से सक्षम हो सके। इस कार्यक्रम में एससीआरटी के विषय विशेषज्ञों के अलावा सहयोग के लिए डाइट के अकादमिक सदस्य भी उपस्थित थे।
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