बीजिंग
कोविड प्रतिबंधों को लेकर जनता के विरोध के आगे चीन की शी जिनपिंग सरकार को घुटने टेकने पड़े। दो साल के बाद चीन ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए लागू प्रतिबंधों में कई ढील देने की घोषणा की है। इसमें लॉकडाउन के नियमों को पूरे जिले या इलाके के बजाय किसी इमारत या उसकी विशेष मंजिल पर लागू किए जाने का नियम शामिल है।
नए नियमों के तहत कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने वाले लोग अस्पतालों में भर्ती होने के बजाय घर पर ही क्वारंटीन रह सकेंगे। इसके अलावा, जिन स्कूलों में संक्रमण का कोई मामला नहीं मिला है, वहां ऑफलाइन कक्षाएं शुरू की जा सकेंगी। ये रियायतें सख्त ‘जीरो कोविड’ नीति को लेकर चीन के विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शनों के मद्देनजर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में तीन साल से लागू इन प्रतिबंधों के चलते आम जनजीवन, यात्रा और रोजगार प्रभावित हुआ है, साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है।
चीन की सरकार ने अब सार्वजनिक जगहों पर जाने के लिए पीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी है। हालांकि स्कूलों और अस्पतालों में पीसीआर टेस्ट अनिवार्य होगा। बीते लगभग एक महीने से चीन की जीरो कोविड पॉलिसी के खिलाफ चीन में प्रदर्शन चल रहा था। हालांकि अब चीनी सरकार अपनी इस पॉलिसी को लेकर बैकफुट पर है। बता दें कि जहां एक तरफ दुनियाभऱ में कोरोना के केस ना के बराबर हैं वहीं चीन में अब भी 30 हजार से ज्यादा केस आरहे हैं।
नई लॉकडाउन गाइडलाइन में कहा गया है कि जिन इलाकों में चार दिन तक नया केस नहीं मिलेगा उन्हें खोल दिया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों में भी अगर ज्यादा संक्रमण नहीं फैला तो उन्हें भी खोला जाएगा। अब तक चीन में कोविड संक्रमित लोगों को जबरदस्ती क्वारंटीन कैंप या फिर अस्पताल ले जाया जाता था। गार्ड लोगों को जबरदस्ती घर से खींचकर अस्पताल ले जाते थे।
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