भोपाल
एक बार फिर से व्यापमं महाघोटाले का जिन्न बाहर निकला है। इस बार पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की शिकायत पर एसटीएफ ने आठ लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। यह शिकायत दिग्विजय सिंह ने करीब आठ साल पहले एसटीएफ के तत्कालीन एडीजी सुधीर कुमार साही को की थी। मंगलवार को दर्ज हुए इस प्रकरण में आरोपियों की जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। यह मामला पीएमटी की वर्ष 2008 और 2009 की परीक्षा से जुड़ा हुआ है।
सूत्रों की मानी जाए तो दिग्विजय सिंह ने वर्ष 2014 में तत्कालीन एडीजी एसटीएफ को शिकायत की थी जिसमें उन्होंने कुछ छात्रों के नाम की सूची और दस्तावेज भेजे थे। जिसमें उन्होंने फर्जी तरह से भर्ती होने की आशंका जताई थी। दस्तावेज जो उन्होंने एसटीएफ को दिए थे उनमें उन्होंने बताया था कि इसमें ऐसे चयनित छात्रों के नाम हैं जिनके निवास के पते समान है। वहीं उन्होंने यह भी बताया था कि जिसमें चयनित छात्रों ने कक्षा 10 वीं और 12 वीं की परीक्षा उत्तर प्रदेश बोर्ड से उत्तीर्ण की थी, लेकिन उनके मूल निवासी प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के हैं। वहीं उन्होंने यह भी बताया था कि परीक्षा फार्म में लगाए गए फोटो और सीट आवंटन पत्र में चस्पा फोटो अलग-अलग हैं। इस आशंका के साथ उन्होंने छात्रों की जांच के लिए लिखा था।
ये बने आरोपी
प्रशांत मेश्राम निवासी बालाघाट, अजय टेगर निवासी मुरैना, कृष्ण कुमार जायसवाल निवासी अम्बिकापुर छत्तीसगढ़, अनिल चौहान निवासी बड़वानी, हरिकिशन जाटव निवासी मुरैना, शिवशंकर प्रसाद निवासी रीवा, अमित बडौले निवासी बड़वानी और सुलवंत सिंह मौर्य निवासी झाबुआ को आरोपी बनाया गया है।
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