डिंडोरी
सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यनरत कक्षा 12वीं के 19 में से 16 विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिका में फेरबदल कर संबंधित विषय में फेल कराने के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की अदालत ने शिक्षक दंपति को पांच-पांच वर्ष की सजा से दंडित किया है।
2010 में ललित पारधी उत्कृष्ट विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्य कर रहे थे और उनकी पत्नी दीप्ति पारधी सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में शिक्षिका के रूप में पढ़ा रही थी, साथ ही अपने विषय की अपने क्लास के बच्चों को अलग से ट्यूशन भी पढ़ती थी। जिन 16 बच्चों के भविष्य के साथ शिक्षक दंपति ने खिलवाड़ किया वो 11वी क्लास में दीप्ती पारधी से ही ट्यूशन पढ़ते थे।मगर 12वी में उन्होंने दूसरे टीचर से ट्यूशन पढ़ना शुरू कर दिया था,जिससे पारधी दंपति इन 16 छात्रों से नाराज थे और परीक्षा में देख लेने की धमकी भी देते थे।
बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केंद्र कस्तूरबा कन्या स्कूल था। परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाएं उत्कृष्ट स्कूल डिंडौरी में जमा कराई गईंं। उत्तरपुस्तिका जमा करने की पावती में ललित पारधी के हस्ताक्षर थे। बताया गया कि संबंधित पीड़ित विद्यार्थियों के जिन्होंने संबंधित शिक्षिका से ट्यूशन नहीं पढ़ी थी उनकी उत्तरपुस्तिकाओं के पेज बदल दिए गए। दूसरे पेज लगे जिनमें उनकी राइटिंग भी अलग थी। इस मामले में छात्रा शिल्पा केशवानी पिता सुरेश केशवानी सहित अन्य विद्यार्थियों ने न्यायालय की शरण ली। बताया गया कि आरोपितों पर धारा 420, 468, 479, 34 सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ था।
वर्ष 2010 से ही मामला न्यायालय में लंबित था।जिसका निर्णय लंबे समय से प्रतीक्षित रहा है।प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है। उक्त मामले में अभियोजन साक्ष्यों के साक्ष्य के आधार पर आरोपी ललित पारधी पिता बी.आर. पारधी उम्र 54 वर्ष एवं आरोपिया दीप्ती पारधी पति ललित पारधी उम्र 51 वर्ष दोनों निवासी सिविल लाईन डिण्डौरी को दोषी पाते हुए धारा 420 सहपठित धारा 343 के अपराध के लिए प्रत्येक आरोपी को 05-05 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000-5000 रूपये के अर्थदण्ड , धारा 468 सहपठित धारा 343 के अपराध के लिए प्रत्येक आरोपी को 05-05 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000-5000 रूपये के अर्थदण्ड एवं धारा 469 सहपठित धारा 343 के अपराध के लिए प्रत्येक आरोपी को 02-02 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000-2000 रूपये के अर्थदण्ड के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । अर्थदण्ड की राशि अदा न करने पर प्रत्येक अपराध धारा के अंतर्गत 06-06 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताये जाने के आदेश पारित किये गये ।
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