बीजिंग
अपनी विस्तारवादी नीतियों और तानाशाही रवैये की वजह से चर्चा में बना रहने वाला चीन अपने भीतर के विरोध और कोरोना महामारी से पस्त हो गया है। राजधानी बीजिंग का यह हाल है कि अस्पतालों और अंतिम संस्कार गृहों में कर्मचारी नहीं हैं। ज्यादातर लोग कोरोना से संक्रमित हैं। वहीं चीन की चिकित्सा व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही हैं। शनिवार की स्थिति की बात करें तो राजधानी बीजिंग में अंतिम संस्कार की सारी जगहें व्यस्त थीं। लगातार शव लाए जा रहे थे। इसके अलावा कोरोना तेजी से फैल रहा है और अस्पतालों में जगह नहीं बची है।
ओमिक्रोन वेरिएंट को कमजोर कहने के बाद चीन की जीरो-कोविड पॉलिसी के खिलाफ विरोध शुरू हो गया था। इसके बाद शी जिनपिंग की सरकार को घुटने टेकने पड़े और अपने नियमों में ढील देनी पड़ी। दूसरी तरफ चीन अब दुनिया के अन्य देशों की तरह लॉकडाउन, बड़ी संख्या में कोविड टेस्टिंग, यात्रा पर पाबंदियों से बाहर निकलना चाहता है।
चीन ने अपनी 1.4 अरब की आबादी से कह दिया है कि जब तक स्थिति गंभीर ना हो लोग घर पर रहकर ही अपना इलाज करें। बीजिंग में रेस्तरां, कुरियर फर्म, अस्पताल औऱ फ्युनरल पार्लर खाली पड़े हैं क्योंकि यहां स्टाफ ही नहीं है। एक फ्यूनरल होम की तरफ से रॉयटर्स को बताया गया कि आजकल अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है क्योंकि स्टाफ कोरोना संक्रमित है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ज्यादा लोगों की मौत कोरोना के बढ़ने की वजह से है या फिर स्टाफ की कमी की वजह से।
एक कर्मचारी ने कहा कि पिछले दिनों एक शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को तीन दिन तक इंतजार करना पड़ा। इसके अलावा लोगों को शव खुद लाना पड़ता है क्योंकि ड्राइवर भी बीमार हैं। बता दें कि चीन प्रशासन की तरफ से 3 दिसंबर को राजधानी में कोरोना से मौत का ब्यौरा दिया गया था। वहीं चीन के एक टीवी चैनलल ने शुक्रवार को भी कहा था कि दो जानेमाने पत्रकार कोरोना की वजह से मर गए।
हालांकि चीनी स्वास्थ्य विभाग अब मौतों को आंकड़ों में जोड़ ही नहीं रहा है। अमेरिका बेस्ड इस्टिट्यूट हेल्थ मीट्रिक्स इवैलुएशन के मुताबिक 2023 तक चीन में 10 लाख से ज्यादा मौतें हो जाएंगी। चीन के ही एक वैज्ञानिक ने कहा था कि चीन में कम से कम ढाई लाख मौतें हो चुकी है। हलांकि 5 दिसंबर के बाद से कोविड के गंभीर लक्षण वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है।
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