गोरखपुर
गोरखपुर से मुंबई की यात्रा कर रहे 19 वर्षीय युवक को उस समय झटका लगा जब टीटीई ने बताया कि टिकट में उसकी उम्र 64 साल अंकित है। टीटीई ने पेनाल्टी के साथ दूसरा टिकट बनाया तो बर्थ भी उसकी दूसरे को मिल गई। उसने टीटीई को बताया कि टिकट बनाने के लिए उसने आधार कार्ड एजेंट के पास भेज दिया था। एजेंट ने टिकट कराया और मैसेज मोबाइल पर आ गया। बहुत जानकारी न होने की वजह से जांच नहीं पाया।
टिकट दलाल पैसा कमाने के लिए नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं। कुछ में तो उनका खेल चल जाता है तो कुछ में मामले पकड़ में आ जाते हैं। इन दिनों कंफर्म टिकट हथियाने के लिए युवाओं की उम्र ज्यादा दर्शा देते हैं। अगर टीटीई ने ध्यान नहीं दिया तो काम बन गया और पकड़े जाने पर जुर्माना तो लगता ही है, बर्थ भी नहीं मिलती है। क्योंकि टिकट पर दर्ज ब्योरा के पहचान पत्र से मेल नहीं खाने पर बेटिकट माना जाता है।
ऑल इंडिया टिकट चेकिंग स्टाफ आर्गनाइजेशन के संरक्षक और सीटीटीई टीएन पाण्डेय ने बताया कि इन दिनों में ट्रेनों में भीड़ देख दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। जो उनके चंगुल में फंस जा रहा है, उसकी यात्रा ही खराब हो जा रही है। पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने कुशीनगर एक्सप्रेस में ऐसे युवाओं को पकड़ा था जिनकी उम्र 22 और 24 साल थी लेकिन उनके टिकट पर उनका उम्र 61 और 63 साल अंकित था। नियमत उन दोनों युवा यात्रियों का दूसरा टिकट बनाना पड़ा।
कुशीनगर में भी पकड़ा गया मामला
20 दिन पहले कुशीनगर एक्सप्रेस में मुम्बई तक यात्रा करने वाले गौरव नाम के यात्री के उम्र के अंतर पर टीटीई ने पेनाल्टी के साथ दूसरा टिकट बनाया तो उसके होश उड़ गए। टीटीई ने बताया कि आधार कार्ड में उम्र 21 साल जबकि टिकट 62 वर्ष की उम्र दिखाकर सीनियर सिटीजन कोटे से लिया गया था। यात्री ने बताया कि उसने एक एजेंट से टिकट बुक कराया था। एजेंट ने स्लीपर क्लास के कंफर्म टिकट के लिए 2500 रुपये लिए थे।
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