कोलंबो
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) तमिलनाडु में आतंक फैलाने की कोशिश में है। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) जिसे लिट्टे के रूप में जाना जाता है, उसको आईएसआई पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है। द आइलैंड ऑनलाइन की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
NIA ने नौ लोगों को किया गिरफ्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस सप्ताह की शुरुआत में लिट्टे के पुनरुद्धार से संबंधित एक अवैध ड्रग्स और हथियारों के मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने एक नोट में कहा कि यह मामला श्रीलंका के ड्रग माफिया की गतिविधियों से संबंधित है, जो गुनाशेखरन और पुष्पराजा द्वारा पाकिस्तान में स्थित ड्रग्स और हथियार सप्लायर हाजी सलीम के सहयोग से नियंत्रित है।
लिट्टे के पुनरुद्धार की कोशिश
द आइलैंड ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, यह मॉड्यूल भारत और श्रीलंका में काम कर रहा है और लिट्टे के पुनरुद्धार के लिए धन जुटाने के लिए दवाओं और हथियारों की तस्करी कर रहा है। पाकिस्तान द्वारा दक्षिण भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देना कोई नई बात नहीं है। 2014 में, एनआईए ने एक मॉड्यूल का पता लगाया था जिसे कोलंबो में पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। उच्चायोग तमिलनाडु में कुछ गुर्गों की देखरेख कर रहा था, जो कई जगहों की टोह लेकर हमला करने की योजना बना रहे थे।
तमिल राष्ट्रवाद से जोड़कर लिट्टे आंदोलन शुरू करने की मंशा
द आइलैंड ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इस मोड्यूल के जड़ से खत्म हो जाने के बाद, आईएसआई अब तमिलनाडु और श्रीलंका में लिट्टे आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि फरवरी में लिट्टे आंदोलन को तमिल राष्ट्रवाद से जोड़कर इसे पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे थे। एनआईए ने संगठन के पूर्व गुर्गों को गिरफ्तार किया था और पाया कि ये यूरोप में कुछ व्यक्तियों से जुड़े थे।
दवा उद्योग से कमाई कर आतंकियों को वित्तपोषित कर रहा ISI
एक इंटेलिजेंस ब्यूरो डोजियर का कहना है कि आईएसआई द्वारा सहायता प्राप्त दवा उद्योग दवाओं की बिक्री के माध्यम से सालाना लगभग 380 अरब रुपये कमाता है। आईएसआई इस पैसे का इस्तेमाल अपने आतंकवादियों को धन मुहैया कराने के लिए करता है।
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