नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ हमलावर रहने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ शांत नजर आ रही हैं। फिलहाल की दो सियासी घटनाओं ने चर्चाएं तेज कर दी हैं। सीएम बनर्जी ने हाल ही में शाह से मुलाकात की। वहीं, कुछ समय पहले उन्होंने विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का जिम्मेदार पीएम को मानने से इनकार कर दिया था। सवाल है कि क्या पश्चिम बंगाल ने भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं के खिलाफ अपना रुख नरम कर लिया है?
बुधवार को ही सीएम बनर्जी ने ऐलान किया है कि वह कोलकाता में होने वाले उस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगी, जहां पीएम मोदी भी शामिल होने वाले हैं। 16 दिसंबर को बनर्जी और शाह के बीच 15 मिनट की एक बैठक सीएम के कमरे में हुई थी। बीते महीने दिल्ली यात्रा के दौरान भी उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात थी। उस दौरान राज्य में सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र में विस्तार के फैसले को वापस लेने की मांग उठाई गई थी।
क्या हो सकती है वजह
दोनों नेताओं को लेकर बदले तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो के रुख के कई कारण गिनाए जा रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, प्रदेश की आर्थिक तंगी के चलते वह मजबूर हैं और उन्हें केंद्र से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि केंद्र के फंड वितरण रोकने के फैसले से प्रदेश प्रशासन को झटका लगा है और सीएम उनकी सरकार के आर्थिक भार को कम करने में पीएम और गृहमंत्री की मदद चाह रही हैं। इधर, विपक्ष आरोप लगा रहा है कि स्कूल जॉब स्कैम के बाद से ही बनर्जी बैकफुट पर हैं और भाजपा के साथ राजनीतिक समझ बनाना चाहती है, ताकि केंद्रीय एजेंसियां शांत हो जाएं।
TMC की तरफ से जारी हैं जुबानी हमले
सीएम बनर्जी भले ही दोनों नेताओं को लेकर शांत नजर आ रही हों, लेकिन उनकी पार्टी की तरफ से जुबानी हमले जारी हैं। हाल ही में सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे और पूछा था 'पप्पू कौन है?' सितंबर में टीएमसी प्रमुख के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कोयला तस्करी मामले में ईडी की तरफ से पूछताछ के बाद शाह पर निशाना साधा था। उन्होंने भाजपा नेता के खिलाफ टीशर्ट अभियान शुरू किया था।
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