भोपाल
कोरोना के नए वैरिएंट की दस्तक के साथ मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में कोरोना की आरटीपीसीआर जांच की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए 39 जिला अस्पतालों में पीसीआर मशीनें लगाई जा चुकी हैं। अगले वर्ष से यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
स्वास्थ्य आयुक्त डा. सुदाम खाड़े ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखकर माइक्रोबायोलाजिस्ट और लैब टेक्नीशियन की व्यवस्था करने को कहा है। अभी सिर्फ मेडिकल कालेजों में ही कोरोना की जांच हो रही है। सैंपल भेजने में देरी की वजह से रिपोर्ट आने में विलंब होता है।
कोरोना के उपचार के लिए भारत सरकार से मिली राशि से यह लैब तैयार की जा रही हैं। इन्हें जिला लोक स्वास्थ्य प्रयोगशाला नाम दिया गया है। कोरोना के अलावा इन लैब में डेंगू, स्वाइन फ्लू, स्क्रब टायफस समेत अन्य संक्रामक बीमारियों के लिए जिम्मेदार वायरस की भी पहचान हो सकेगी।
इसके अलावा एचआइवी से संक्रमित मरीजों में वायरल लोड का पता भी इन प्रयोगशालाओं से चल जाएगा। इससे एचआइवी संक्रमित मरीजों के इलाज में आसानी हो जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी जिलों से दो लैब टेक्नीशियन को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
साथ ही जांच किट और अन्य सामग्री खरीदने के लिए प्रति संस्था एक लाख रुपये दिए गए हैं। मौजूदा स्थिति में निजी और सरकारी मिलाकर 35 प्रयोगशालाओं में एक लाख 24 हजार सैंपल प्रतिदिन आरटीपीसीआर से जांचने की क्षमता है। इसमें प्रदेश सरकार द्वारा अनुबंधित तीन निजी लैब भी शामिल हैं।
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