रायपुर
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का नाम लिए बगैर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, भारत को जोड़ने का अभियान जरूर चलाया जाना चाहिए। लेकिन पहले यह तय होना चाहिए कि हमें जोड़ना क्या है? हम कल्पना में ही तोड़ रहे हैं और कल्पना में ही जोड़ रहे हैं। बेहतर होगा प्रामाणिक तौर पर तो टूटा है उसे जोड़ा जाए। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, प्रामाणिक तौर भारत से पाकिस्तान और बांग्लादेश अलग हुए हैं, उसे जोड़ा जाना चाहिए।
इंटरनेट पर लगाम लगाना जरूरी, युवा हो रहे दिग्भ्रमित
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इंटरनेट पर लगाम लगाने की बात कही। उन्होंने कहा, वर्तमान में आधुनिकीकरण का बोलबाला है। जीवन में प्रगति करने के लिए आधुनिक यंत्रों का उपयोग आवश्यक है। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन इंटरनेट पर लगाम लगाना भी जरूरी है। इंटरनेट पर ज्ञान का भंडार है। ज्ञान लेकर अनेक युवा प्रगति कर रहे हैं। इसके विपरीत हर व्यक्ति विवेकशील नहीं हो सकता इसलिए इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली सामग्री से युवा दिग्भ्रमित ज्यादा हो रहे हैं। इंटरनेट पर नियंत्रण होना चाहिए ताकि बच्चे, युवाओं का मस्तिष्क व्यर्थ की बातों में न उलझे।
शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आधुनिक दौर में इंटरनेट सूचना और संवाद का अच्छा माध्यम है। धर्म, संस्कृति, स्कूल, कालेज, जनरल नालेज की बेहतर जानकारी है। साथ ही अश्लील सामग्री, भड़काऊ लेखन सामग्री, धर्म से विमुख करने वाली भ्रामक जानकारी भी है। युवाओं को अपने विवेक के आधार पर इंटरनेट का बेहतर उपयोग करना चाहिए।
त्यागमय जीवन जीने वाले महान
शंकराचार्य ने कहा कि जरूरी नहीं है कि जो व्यक्ति सक्षम है, वह बड़ा है। एक निर्धन व्यक्ति भी महान हो सकता है, यदि वह त्यागी, तपस्वी हो। धर्म करने के लिए पैसों की आवश्यकता नहीं है। सेवा, परोपकार, त्यागमयी जीवन जीने वाला ही महापुरुष होता है। बड़े-बड़े नेता, अधिकारी, अमीर भी तपस्वी के आगे शीश झुकाते हैं।
धर्म की रक्षा करने आगे आएं
शंकराचार्य ने कहा कि धर्म की रक्षा करने के लिए आगे आएं। धर्म के मार्ग पर चलें। धन से थोड़ा बहुत सुख पाया जा सकता है, लेकिन धन ही सब कुछ नहीं है। आपस में दुख-सुख बांटें। जो व्यक्ति धर्म करता है, धन उसके पास आ ही जाता है। अच्छाई के मार्ग पर बढ़ते रहें।
ब्रह्मचारी इंदुभवानंद ने किया स्वागत
बोरियाकलां स्थित शंकराचार्य आश्रम में आगमन पर ब्रह्मचारी इंदुभवानंद महाराज ने शंकराचार्य का अभिनंदन किया। छत्तीसगढ़ प्रवास में बेमेतरा, कवर्धा, पांडातराई, पंडरिया, धमधा, अहिवारा, कुम्हारी होते हुए वे धमतरी रोड स्थित राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूजन, दर्शन किया और वे दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad

