भोपाल
पूर्व सीएम उमा ने गुरुवार को दिए ट्वीट में सफाई देते हुए कहा कि मैंने ऐसा क्यों कहा, इसकी जानकारी देने के लिए ट्वीट कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनावों में कुछ विधानसभा क्षेत्रों से उनकी सभा से पहले लोधी समाज से फोन उनके आॅफिस में आए थे कि दीदी सभा रद्द कर दीजिए, हम यहां के बीजेपी के उम्मीदवार से नाराज हैं। उमा ने कहा कि उसी के जवाब में मैंने उस दिन ऐसा कहा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कांंग्रेस को हमारे बीच में आने की जरूरत नहीं है, मुझे भाजपा साइडलाइन नहीं करती, मेरी अपनी एक सीधी लाइन है और मैं उसी पर चलती हूँ।
उमा के अनुसार यह बात उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पहली बार नही बोली। जब विधानसभा चुनाव हार गए और कांंग्रेस का एक समूह टूटकर आया एवं उसके सहारे बीजेपी ने सरकार का गठन किया तथा मंत्रिमंडल बना। तब भी सार्वजनिक तौर पर बयान दिया था कि इस मंत्रिमंडल में जाति एवं क्षेत्र का संतुलन बिगड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी मेरे नेता, भाजपा मेरी पार्टी है। मैंने कभी भाजपा नही छोड़ी, मुझे निकाला गया था। तब अपने कर्त्तव्य पथ पर चलते रहने के लिए राष्ट्रवादी विचार की धाराप्रवाह में ही अपना दल बनाया। फिर उस समय के भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी के निमंत्रण पर भारतीय जनशक्ति का भाजपा में विलय करते हुए भाजपा में वापस आ गई।
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