जनप्रतिनिधि नहीं देते ध्यान, केवल देते हैं आश्वासन
बक्सवाहा
विकास के तमाम वादे जनप्रतिनिधि करते हैं लेकिन विकास आखिर है कहां ! यह हकीकत बयां कर रही है ! एक तरफ जहा आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के बाद "अमृत महोत्सव "देश मना रहा है वही दूसरी तरफ सनोदा पंचायत में डंगरई से सनोदा जाने वाली लगभग 5 किलोमीटर की सड़क आज भी पथरीली है ग्रामीण परेशान हो रहे हैं बच्चे स्कूल जाने के लिए इसी पथरीली सड़क पर चलने को मजबूर हैं जब बरसात होती है तो ग्रामीण और बच्चों का इस सड़क पर चलना दूभर हो जाता है !
गांव में रहने वाले हल्ले आदिवासी कहते हैं कि पथरीली सड़क होने के कारण ग्रामीणों को इस पर चलने में दिक्कत होती है कई हादसे भी होते हैं लेकर जनप्रतिनिधि है कि वो सुनते ही नहीं है ! गांव में रहने वाले श्री राम बंसल कहते हैं कि उनके पूर्वज भी इसी पथरीली सड़क पर चले उनके पिताजी भी सड़क पर चले और तीसरी पीढ़ी के श्री राम बंसल जी पथरीली सड़क पर चलने के लिए मजबूर हैं !
बरसात के समय में आने जाने में होती है दिक्कत
जब बरसात होती है तो इस सड़क पर चलना और भी मुश्किलों भरा हो जाता है कहने को तो सरकारे आती है जाती है विकास के तमाम वादे चुनाव जीतने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा किए जाते हैं लेकिन जीतने के बाद कितना विकास होता है यह इस पथरीली सड़क की तस्वीरें बयां कर रहे हैं !
स्कूली छात्रों को करना पड़ता है भारी मुसीबत का सामना
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे – बच्ची इसी सड़क पर चलने को मजबूर है और रोज चलने में में उन्हें भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है !
टूटी हुई सड़क की समस्या पिछले कई दशकों से बनी हुई है मैं अभी नवनिर्वाचित सरपंच हूं शीघ्र ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करूंगी और पंचायत में नई सड़क के लिए अधिकारियों को जानकारी दूगी !
लक्ष्मीबाई बंसल सरपंच सनोंदा
इस मामले मे मुख्यकार्यपालन अधिकारी हर्ष खरे का कहना है कि पहले ये सडक मुख्यमंत्री ग्राम सडक योजना के अन्तर्गत बनाई गयी थी अब इसे प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना मे जोड दिया गया है उपरोक्त विभाग ही इस काम को करायेगा।
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