भोपाल
आने वाले सोमवार 16 जनवरी से प्रदेश के सभी कोषालय सीधे रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम से जुड़ जाएंगे। इस सिस्टम के शुरु होने से सारे भुगतान और रिफंड के काम अब एक से दो घंटे में हो सकेंगे। मध्यप्रदेश में अब आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और ई-कुबेर सिस्टम से ही सारे भुगतान होंगे। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विंध्याचल और भोपाल ट्रेजरी के पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था 16 जनवरी से लागू होगी।
अभी तक कोषालयों से होने वाले भुगतान में होने वाली लंबी प्रक्रिया से निजात मिल सकेगी और आधार आधारित भुगतान प्रणाली से वास्तविक हितग्राही के खाते में राशि पहुंचाना आसान होगा। इससे गलत व्यक्ति के पास भुगतान होंने, भुगतान में देरी और गलत भुगतान के मामलों में होने वाले रिफंड में लगने वाला समय कम होगा। अब दिन की बजाय चंद घंटों में यह काम हो जाएंगे। वित्त विभाग के सचिव तथा आयुक्त कोष एवं लेखा ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि मध्यप्रदेश कोषालय में आधार आधारित भुगतान करने वाला देश का पहला अग्रणी राज्य हो गया है। अब प्रदेश में भुगतान के दो सिस्टम काम करेंगे। एक आधार बेस्ड एसबीआई का सिस्टम होगा जिससे आधार से लिंक बैंक खातों में दो से तीन घंटों में नेशनल पेमेंट कारपोरेशन आॅफ इंडिया के सिस्टम से भुगतान होंगे। दूसरा सिस्टम ई कुबेर सिस्टम से कोषालयों के जरिए सीधे भुगतान करने का रहेगा। इसमें अलग से बैंक खाते रखने की जरुरत नहीं होगी। सीधे आरबीआई के खाते का उपयोग ई कुबेर सिस्टम में किया जाएगा। एनईएफटी के जरिए भुगतान होगे और यह सिस्टम चौबीस घंटे काम करेगा। इसमें दस हजार खातों में भुगतान की लिमिट भी बाधक नहीं रहेगी एक साथ पचास हजार लोगों के बैंक खातों में भुगतान हो सकेगा। खाते मैच नहीं होने और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण भुगतान असफल होने की स्थिति में ऐसे भुगतान को तुरंत चिन्हित कर उनमें दोबारा राशि भेजना भी घंटों में हो जाएगा।
फेसलेस भुगतान भी करने की तैयारी
मौजूदा एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली की जगह अब फेसलेस, पेपरलेस, कांटेक्टलेस और कैशलेस वित्तीय भुगतान को लागू करने के लिए यूजर फ्रैंडली सिस्टम को विकसित करने के लिए आईएफएमआईएस नेक्स्ट जेन का विकास किा जा रहा है।
यह दिक्कतें खत्म होंगी
अभी तक जो भुगतान होते थे उसमें आईएफएमएस से होंने वाले भुगतान में एसबीआई में भुगतान अटक जाने पर बैंक अगले दिन दिखाता था। उसके बाद आरबीआई उसके अगले दिन दिखाता था। एजी भी पूछता था और वित्तीय समस्या होती थी। केसिलेशन के मामले में भी देरी होती थी। भुगतान होंने पर बिल जनरेट होता था। एसएमएस आता था और अगले दिन भुगतान होता था। गलत चालान आ जाने पर बाउचर बनते थे और गलत रिफंड वापस होंने में समय लग जाता था। अब इन सभी समस्याओं से निजात मिलेगी और सारे भुगतान और रिफंड एक से दो घंटे में बल्क में हो सकेंगे। जल्दी भुगतान होगा, सही हितग्राही को भुगतान होगा और एक साथ हजारों लोंगो को त्रुटिरहित भुगतान हो सकेगा। कोषालय से बैच के रुप में आपरेट सिस्टम बंद कर नई प्रणाली के जरिए वित्तीय भुगतान के जरिए हितग्राहियों को एक से दो घंटे में भुगतान हो सकेगा।
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