भोपाल
भोपाल में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की दो दिन बैठक हुई. चुनाव का साल है और सत्ता में बीजेपी है, जाहिर है बैठक की चर्चा बाहर भी होती रही. लेकिन इसमें सबसे ज्यादा चर्चा में वो बैठक है जिसमें सिंधिया समर्थक विधायकों मंत्रियों से बंद कमरे में गुफ्तगूं की गयी. इसने सबका ध्यान खींच लिया. सत्ता के गलियारों में इसका जिक्र बड़े चटखारे लेकर हो रहा है.
बीजेपी कार्यसमिति की बैठक के दौरान एक बैठक ऐसी भी हुई जिसकी चर्चा अब तक हो रही है. प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद बीजेपी दफ्तर में डाटा प्रबंधन और आकांक्षी विधानसभाओं की बैठक आयोजित की गई. उसी दौरान मध्य क्षेत्र के संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने अचानक से सिंधिया समर्थक मंत्रियों को एक कमरे में अलग से बुलाया. इस बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रभु राम चौधरी, तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर और राजवर्धन सिंह दत्तीगांव पहुंचे. लगभग आधे घंटे तक इन सब के बीच बंद कमरे में बातचीत होती रही.
शीशे के पीछे दिखा सब, सुना कुछ नहीं
यह बैठक प्रवक्ता कक्ष में हुई और उसमें ट्रांसपेरेंट ग्लास लगा हुआ था. इसलिए वहां मौजूद पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने देखा तो सब लेकिन सुनाई कुछ नहीं आया. किसी को यह नहीं पता चला कि आखिर बैठक में हुआ क्या? बैठक से निकलने के बाद पत्रकारों ने सिंधिया समर्थक मंत्रियों से बात करने की कोशिश की लेकिन किसी ने भी कैमरे के सामने कुछ नहीं बोला.
बैठक के बाद जुबानी जंग
बैठक बंद कमरे में हुई और सिंधिया समर्थकों के साथ हुई. यही कारण है इसकी भनक जैसे ही कांग्रेस को लगी वह चुटकी लेने से नहीं चूकी. कांग्रेस मीडिया विभाग अध्यक्ष के के मिश्रा का कहना है उन्हें इस बात की जानकारी और फोटो वीडियो उपलब्ध कराए गए हैं. जिस तरह से सिंधिया समर्थक इन मंत्रियों का पिछले कुछ दिनों से विवाद से नाता रहा है ऐसे में इन लोगों को नसीहत देने के लिए बुलाया गया था. इन मंत्रियों के विवाद से बीजेपी की छवि को नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसलिए इन्हें अलग से बुलाया गया था.
बीजेपी ने कहा-कुछ खास नहीं, बस यूं ही
हालांकि बीजेपी प्रवक्ता नेहा बग्गा का कहना है पार्टी बैठकों का दौर जारी है. उसी सिलसिले में यह बैठक हुई. आने वाले समय में इन मंत्रियों के इलाकों में संगठन को कैसे विस्तार दिया जाए इस पर चर्चा हुई. कांग्रेस के आरोपों पर कहा खेमेबाजी तो कांग्रेस में होती है. यहां कोई खेमेबाजी नहीं है. सभी एक साथ मिलकर पार्टी की रीति नीति के हिसाब से काम करते हैं.
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