भारत में बढ़ेगा चीतों का कुनबा, दक्षिण अफ्रीका से अगले माह मिलेंगे 12 चीते

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  नई दिल्ली 

भारत ने मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में 12 चीतों के स्थानांतरण के लिए दक्षिण अफ्रीका के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है। पर्यावरण मंत्रालय में एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बता दें कि पिछले साल सितंबर में नाबीमिया से लाकर आठ चीते कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़े गए थे। अधिकारी ने बताया कि समझौते पर पिछले सप्ताह हस्ताक्षर किए गए और 15 फरवरी तक सात नर और पांच मादा चीतों के कुनो पहुंचने की उम्मीद है। मंत्रालय भारत से लुप्त हो चुके चीतों को फिर से बसाने के लिए सक्रिय है।

दक्षिण अफ्रीका के पर्यावरण विभाग ने गुरुवार को कहा कि एक दशक तक हर साल 12 चीतों को भेजने की योजना है। भारत ने अभी तक इस संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है। अधिकारी के मुताबिक, पिछले साल जुलाई से 12 दक्षिण अफ्रीकी चीते पृथक-वास में हैं और उनके इस महीने कुनो पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन दक्षिण अफ्रीका में कुछ प्रक्रियाओं में समय लगने के कारण उनके स्थानांतरण में देरी हुई। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों को जल्द ही चीतों के हस्तांतरण के लिए वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी कन्वेंशन (सीआईटीईएस) के तहत एक निर्यात परमिट और एक प्रमाणपत्र प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि भारत ने सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है।

वन्य जीवों एवं वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी कन्वेंशन (सीआईटीईएस) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका पालन राष्ट्र तथा क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण संगठन करते हैं। भारत भेजे जाने वाले इन 12 चीतों में से तीन को क्वाजुलु-नताल प्रांत में फिंडा पृथकवास बोमा में और नौ को लिम्पोपो प्रांत में रूइबर्ग पृथकवास बोमा में रखा गया है। उन्हें लेकर विमान जोहानिसबर्ग हवाईअड्डे से उड़ान भरेगा। अत्यधिक शिकार और आवास क्षेत्र की कमी के कारण भारत में चीते पूरी तरह से लुप्त हो गए थे। आखिरी चीता वर्तमान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में देखा गया था। उसकी 1947 में मौत हो गई थी और 1952 में इस प्रजाति को भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया था।

कूनो पार्क में बीमार मादा चीता के स्वास्थ्य में सुधार
कूनो नेशनल पार्क (केएनपी) में किडनी और लीवर से जुड़े संक्रमण से ग्रसित एक मादा चीता की हालत अब काफी बेहतर है। मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जेएस चौहान ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मादा चीता साशा की उम्र करीब साढ़े चार साल है। वह हेपटेरैनल संक्रमण से पीड़ित है। उसके गुर्दे और यकृत से संबंधित संक्रमण का निदान किया गया है।

भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के पशु चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में उसका इलाज किया जा रहा है। चिकित्सक दल नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के चीता विशेषज्ञों के लगातार संपर्क में हैं। साशा पिछले साल सितंबर में नामीबिया से केएनपी में लाए गए आठ चीतों में से एक है।
 

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