पैथोलॉजी का दो दिवसीय राज्य स्तरीय वार्षिक अधिवेशन से शुरू

छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर
पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग के आतिथ्य में पैथोलॉजी का राज्य स्तरीय दो दिवसीय 17वाँ वार्षिक अधिवेशन महाविद्यालय परिसर स्थित नवनिर्मित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में शनिवार 4 फरवरी से प्रारंभ हुआ। इस महत्वपूर्ण अधिवेशन में छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग 180 शासकीय एवं निजी पैथालॉजिस्ट भाग ले रहे हैं। इसका औपचारिक शुभारंभ पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक चंद्राकर की अध्यक्षता और आर. प्रसन्ना, सचिव स्वास्थ्य के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।

शुभारंभ समारोह में संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. विष्णु दत्त, अधिष्ठाता डॉ. तृप्ति नागरिया, अधीक्षक डॉ. एस.बी.एस. नेताम, छत्तीसगढ़ पैथालॉजी संघ (आई.ए.पी.एम.सी.जी.) की अध्यक्ष डॉ. रेणुका गहिने और सचिव डॉ. जयन्ती चंद्राकर उपस्थित रहे। अधिवेशन के आयोजन अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अरविन्द नेरल ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि इस सम्मेलन में तमिलनाडु, बेंगलुरु, हैदराबाद तथा नागपुर के ख्याति प्राप्त पैथोलॉजिस्ट व्याख्यान दे रहे हैं और अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। डॉ. नेरल ने स्वास्थ्य सचिव से चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में भविष्य में पृथक ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और हीमेटोलॉजी विभाग प्रारंभ करने के लिये आग्रह किया।

स्वास्थ्य सचिव आर. प्रसन्ना ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जैसा कि आप सभी जानते हैं चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारियों की रोकथाम और निदान के लिए नैदानिक (डायग्नोस्टिक) पक्ष बहुत ही महत्वपूर्ण है। पैथोलॉजिस्ट की भूमिका रोगों के निदान में बहुत महत्वपूर्ण होती है। भविष्य में लोगों के लिये डायग्नोस्टिक सुविधा को और भी बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। इसी तारतम्य में चिकित्सा महाविद्यालय में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और हीमेटोलॉजी विभाग प्रारंभ करने के प्रयास किये जायेंगें।

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