नई दिल्ली
तुर्की और सीरिया में विनाशकारी भूकंप अब तक 7 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। फिलहाल, आंकड़ों का बढ़ना जारी है। सोमवार को ही दोनों देशों ने 7.8 तीव्रता के भूकंप का सामना किया है। हालांकि, कहा जा रहा है कि जानकारों ने इस आपदा की चेतावनी पहले ही दे दी थी। इसके अलावा अब एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां कहा जा रहा है कि प्रकृति भी इस घटना को लेकर चेता चुकी थी।
वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि आसमान में पक्षियों के बर्ताव में अचानक बदलाव आ गया था। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर पर यूजर ने लिखा, 'तुर्की में भूकंप से पहले पक्षियों में अजीब बर्ताव देखा गया।' वीडियो में देखा जा सकता है कि पक्षी तेज आवाज निकाल रहे हैं और इधर-उधर उड़ रहे हैं। हालांकि, पक्षियों ने व्यवहार भूकंप की वजह से ही बदला? यह अभी साफ नहीं है, लेकिन यूजर्स की अपनी राय है। IFS अधिकारी प्रवीण कासवान ने लिखा, ने लिखा कि यह प्रकृति का चेताने का तरीका है। उन्होंने लिखा, 'शायद हम यह जानते ही नहीं है कि इसका इस्तेमाल कैसे करना है।' एक अन्य यूजर ने लिखा, 'हमारी पुरानी परंपराओं में हमारे पूर्वज इसे किसी खतरे के आने के संकेत के तौर पर लेते थे।'
मौजूदा हाल
तुर्की और सीरिया में हाल भयावह हैं। खबर है कि अब मौत का आंकड़ा बढ़कर 8 हजार के करीब पहुंच गया है। फिलहाल, बचाव और राहत कार्य जारी है। भारत समेत कई देशों ने भूकंप प्रभावित इलाकों में मदद भेजी है। भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है। हजारों इमारतों के मलबे में बचे लोगों को ढूंढ़ने के लिए बचावकर्मी काम में लगे हुए हैं। दुनियाभर के देशों ने बचाव एवं राहत कार्यों में मदद के लिए टीम भेजी है। तुर्की की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने कहा कि 24,400 से अधिक आपातकालीनकर्मी मौके पर मौजूद हैं। लेकिन सोमवार के भीषण भूकंप से बड़े इलाके के प्रभावित होने और अकेले तुर्की में ही लगभग 6,000 इमारतों के ढहने की पुष्टि के साथ उनके प्रयास बहुत कम साबित हो रहे हैं।
तुर्की के उपराष्ट्रपति फुअत ओकते ने कहा कि अकेले तुर्की में ही इमारतों के मलबे से 8,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है और करीब 3,80,000 लोगों ने सरकारी आश्रय स्थलों या होटलों में शरण ली है। आपदा में बचे हुए लोगों तक पहुंचने के प्रयास में शून्य से नीचे का तापमान और करीब 200 की संख्या में आए भूकंप के बाद के झटके भी बाधा बन रहे हैं, इससे अस्थिर ढांचों के भीतर लोगों को खोजना काफी खतरनाक हो गया है।
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