भोपाल
मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के शुल्क को लेकर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर बेरोजगारों से एक रुपया नहीं लेंगे। राजस्थान सरकार बजट में फैसला ले चुकी है। यही फैसला मध्यप्रदेश में भी लेंगे। इससे प्रदेश के 30 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड बेरोजगारों को फायदा मिलेगा।
मध्यप्रदेश में इस साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके चलते बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही मैदान में उतर गए हैं। बीजेपी जहां विकास यात्रा निकाल रही है और सीएम शिवराज सिंह चौहान कमलनाथ सरकार के वादों को लेकर सवाल पूछ रहे हैं, तो कांग्रेस नेताओं ने भी मोर्चा संभाला हुआ है। पूर्व सीएम कमलनाथ भी लगातार जुबानी हमले कर रहे हैं। इसी बीच पूर्व मंत्री पटवारी ने व्यावसायिक परीक्षा मंडल और बेरोजगारों का मुद्दा उठाया है। व्यापमं का नाम बदलकर अब मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल कर दिया गया है।
शिवराज सरकार बेरोजगारों से फीस लेना बंद करें
पटवारी ने कहा कि शिवराज सरकार बेरोजगारों से फीस लेना बंद करें। हम इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री से लिखित में मांग कर चुके हैं तो विधानसभा में भी मुद्दा उठा चुके हैं। बावजूद सरकार बेरोजगारों से फीस वसूल रही है, जो गलत है।
हम बेरोजगारों से कोई पैसा नहीं लेंगे
शनिवार को जीतू पटवारी ने किा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही भर्ती परीक्षा शुल्क माफ होगा। कल राजस्थान सरकार का बजट आया है। जिसमें युवाओं से कोई भर्ती परीक्षा शुल्क नहीं लिए जाने का फैसला लिया गया है। इससे राजस्थान के 40 लाख युवाओं को फायदा मिलेगा। हम भी यह मांग प्रदेश में उठा रहे हैं, लेकिन फैसला नहीं लिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के पास 500 करोड़ रुपए की एफडी है, जो बेरोजगारों के रुपए है। यह राशि उसी व्यापमं के पास है, जिस पर पेपर लीक समेत कई आरोप लगे हैं और प्रदेश कलंकित हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनते ही फैसला लेंगे। बेरोजगारों से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा।
पुरानी पेंशन, रोजगार के मुद्दे पर कमलनाथ भी खेल चुके दांव
पटवारी से पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी पुरानी पेंशन, रोजगार के मुद्दे और नियमितीकरण को लेकर दांव खेल चुके हैं। पुरानी पेंशन को लेकर उन्होंने कहा था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही पुरानी पेंशन स्कीम लागू करेंगे। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारें यह स्कीम लागू कर चुकी है। अन्य मुद्दों पर भी कमलनाथ खुलकर मैदान में आ चुके हैं।
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