राज्यपाल पर क्यों सवाल? पूर्व जज अब्दुल नजीर के नाम पर सियासी संग्राम, भाजपा vs कांग्रेस शुरू

राजनीती

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एस अब्दुल नजीर अब आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बन गए हैं। इस नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ हमले शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दल ने इससे न्यायिक व्यवस्था के कमजोर होने की आशंका जताई है। वहीं, भाजपा ने कहा है कि अब भारत को निजी जागीर नहीं समझा जाना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का आठ सेकेंड का एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियों में जेटली यह कहते दिख रहे हैं कि प्री-रिटायरमेंट जजमेंट्स आर इन्फ्लुएंस्ड बाई पोस्ट-रिटायरमेंट जॉब्स यानी सेवानिवृत्त होने से पहले जो फैसले सुनाए जाते हैं वो रिटायर होने के बाद मिलने वाली जॉब से प्रभावित रहते हैं।

पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अरुण जेटली के बयान का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह प्रचलन एकदम गलत है। पार्टी इसका समर्थन नहीं करती है। उन्होंने इसे स्वतंत्र न्यायपालिका के लिए एक खतरा करार दिया। कांग्रेस के कई दूसने नेताओं ने भी इस बारे में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। नजीर की नियुक्ति के बारे में पूछे जाने पर सिंघवी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'आपके(भाजपा के) एक कद्दावर (दिवंगत) नेता, अरूण जेटली ने पांच सितंबर 2013 को संसद में और कई बार इसके बाहर भी कहा था कि सेवानिवृत्ति के बाद पद पाने की आकांक्षा सेवानिवृत्ति से पूर्व के फैसलों को प्रभावित करती हैं। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा है।'

उन्होंने जेटली की टिप्पणी का संदर्भ देते हुए कहा, 'हम व्यक्तियों या निजी व्यक्ति के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। व्यक्तिगत रूप से मैं इस व्यक्ति (नजीर) का काफी सम्मान करता हूं। मैं उन्हें जानता हूं, यह उनके बारे में कहीं से नहीं है। सिद्धांत के तौर पर हम इसका विरोध कर रहे हैं। सिद्धांत के तौर पर हमारा मानना है कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को एक गंभीर खतरा है…।' सिंघवी ने कहा, ''इसलिए, हम इसकी निंदा करते हैं, हम इसका विरोध करते हैं और हम इससे सहमत नहीं हैं।''

भाजपा का पलटवार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट किया, 'एक राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर पूरा ईको-सिस्टम काम पर लग गया है। उन्हें यह बेहतर तरीके से समझ जाना चाहिए कि वे अब भारत को निजी जागीर नहीं मान सकते। अब संविधान के प्रावधानों के अधार पर भारत के लोग भारत का मार्ग तैयार करेंगे।' भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा कि हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस की आदत है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी पार्टी राज्यपालों की नियुक्ति पर भी ऐसा ही कर रही है। उन्होंने कहा, 'पूर्व न्यायाधीशों को अतीत में अनगिनत मौकों पर विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया है। हमारा संविधान भी कहता है कि न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति बाद नियुक्तियों में कुछ भी गलत नहीं है।'

पहले भी हो चुका है ऐसा
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने भी विपक्षी दलों को घेरा है। उन्होंने याद दिलाया है कि जजों की राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति नई बात नहीं है। खास बात है कि हाल के सालों में ऐसे कई मौके आए, जब पूर्व जजों ने यह पद संभाला। पूर्व सीजेआई पी सतशिवम केरल के 21वें राज्यपाल बने थे। वहीं, एम फातिमा बीबी को तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया जा चुका है।

कई बड़े फैसले दे चुके पूर्व जस्टिस नजीर
न्याय व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने वाले नजीर अब राज्यपाल बनने के लिए तैयार हैं। इससे पहले पहले वह अयोध्या राम जन्मभूमिक मामला, नोटबंदी और ट्रिपल तलाक जैसे बड़े फैसलों का हिस्सा रह चुके हैं। रिटायरमेंट से पहले 4 जनवरी को जस्टिस नजीर की अगुवाई वाली बेंच ने नोटबंदी को वैध बताया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आंध्र प्रदेश समेत 12 राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की है।

 

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