कोलकाता
पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार की तकरार की गवाह बन सकती है। कहा जा रहा है कि इसकी वजह नए राज्यपाल सीवी आनंद बोस का एक फैसला हो सकता है। खास बात है कि हाल ही में प्रदेश के बजट सत्र के दौरान बोस अपने भाषण के चलते विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर आ गए थे। इससे पहले पूर्व राज्यपाल और मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और ममता सरकार के बीच खींचतान की खबरें आती रही थीं।
बीते सप्ताह राज्यपाल बोस ने अपनी प्रधान सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को सेवा से मुक्त कर दिया था। कहा गया कि नई टीम के गठन के बाद यह कदम उठाया गया था। एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था, 'हां, नंदिनी चक्रवर्ती को सेवामुक्त कर दिया गया है। (यह) फैसला रविवार को किया गया।' अधिकारी ने कहा, ''राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में बोस राजभवन को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं। उनके कार्यालय का कामकाज देखने के लिए एक नयी टीम गठित की जा रही है। टीम जल्द काम करना शुरू कर देगी।'
TMC हुई नाराज!
माना जा रहा है कि अब तक ठीक चले राज्यपाल और प्रदेश सरकार के रिश्तों में इस फैसले से खटास आ गई है। इस फैसले पर तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा था, 'जब तक राज्यपाल कानूनी प्रावधानों के हिसाब से काम करते हैं और शिष्टाचार बनाए रखते हैं, तो हमारी ओर से भी शिष्टाचार बना रहेगा। लेकिन अगर राज्यपाल राज्य सरकार के खिलाफ अपनी सीमाओं से पार जाकर काम करते हैं, तो हमारी प्रतिक्रिया भी बदलेगी।'
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