पटना
'नीतीश कुमार आरजेडी वाली डील रद्द करें.. उन्हें कुछ लोग गलत सलाह दे रहे हैं। नीतीश कुमार मुझे मेरा वापस लौटाएं।' उपेंद्र कुशवाहा की ऐसी बातों से पहले साफ जाहिर हो गया था कि महागठबंधन और सरकार में तेजस्वी की एंट्री से वह कतई खुश नहीं हैं। उनके दिल की हसरत कुछ और थी, जो महागठबंधन बनते ही चूर-चूर हो गईं। अब लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बिहार में एक नया सियासी समीकरण सामने आ रहा है। जेडीयू से बागी हुए नेता उपेंद्र कुशवाहा औपचारिक तौर पर पार्टी से अलग होने की घोषणा कर सकते हैं। कुशवाहा बीजेपी के साथ गठबंधन कर नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। कुशवाहा के करीबी सहयोगियों ने रविवार को कहा कि नए संगठन का नाम संभवतः पूर्व समता पार्टी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस या समाजवादी नेता और जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के नाम पर रखा जाएगा।
पहले ही मन बना चुके थे उपेंद्र कुशवाहा
नीतीश के साथ तेजस्वी के बढ़ते हाथ को लेकर कुशवाला भीतर ही भीतर मान चुके थे कि अब जेडीयू में रहकर नीतीश-तेजस्वी की जोड़ी से बैर लिए रहने का कोई फायदा नहीं है। अगर लड़ाई लड़नी है तो इसके लिए जेडीयू के दायरे से बाहर आना होगा। यदि उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी से हाथ मिलाते हैं तो इसमें किसे फायदा होगा? शराबबंदी को लेकर बीजेपी सरकार को पहले ही आड़े हाथों लेती रही है।
उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन का कितना करेंगे नुकसान?
ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन के खिलाफ 2024 में बैटिंग भी कर सकते हैं। हालांकि, बिहार में हुए उपचुनाव में उन्होंने बीजेपी के विचारों का समर्थन किया था। संभव है कि लोकसभा चुनाव से पहले वे एनडीए में शामिल हो जाएं। ऐसे में महागठबंधन के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा फैक्टर काफी मायने रखेगा। हालांकि बिहार की सियासत में कुछ भी हो सकता है।
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