मेरठ
आईपीएस ऑफिसर अजय पाल शर्मा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार मामले की एक जांच चल रही थी, जिसमें उन्हें क्लीन चिट मिल गई है। शनिवार को विजिलेंस टीम ने भ्रष्टाचार के मामले में साक्ष्यों न मिलने पर अजय पाल शर्मा के साथ चार और लोगों को यह क्लीन चिट दी है। बता दें, विजिलेंस थाने में अजय पाल शर्मा समेत 4 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौतमबुद्धनगर जिले में IPS अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद एक गोपनीय रिपोर्ट के साथ-साथ एक ऑडियो क्लीप भी लीक हो गई थी। इस मामले में प्रदेश सरकार के छह आईपीएस अधिकारियों पर गाज गिरी थी। इस रिपोर्ट को लेकर एसआईटी और विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी थी। जांच के बाद शासन से अनुमति मिलने के बाद विजिलेंस के इंस्पेक्टर विजय नारायण तिवारी ने 19 सितंबर 2020 को मेरठ के विजिलेंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
यह मुकदमा आईपीएस अजय पाल शर्मा, चंदन राय, अतुल कुमार, शुक्ला और स्वप्निल राय के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था। करीब ढाई साल की जांच के दौरान आवाज के सैंपल भी लिए गए, लेकिन रिकॉर्डिंग और सैंपल से मिलान ना होने के कारण सबूतों का अभाव रहा और अब इस मामले में विजिलेंस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसी अंतिम रिपोर्ट पर कोर्ट में बहस हुई और अब कोर्ट ने FIR स्वीकार कर ली।
मेरठ विजिलेंस कोर्ट के एडीजीसी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि साक्ष्यों के अभाव में अजय पाल शर्मा को राहत मिल गई है और मुकदमे को समाप्त कर दिया गया है। हालांकि, दूसरे मामले में आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार तथा स्वपनिल राय और अतुल शुक्ला निवासी लखनऊ तथा चंदनराय निवासी गाजियाबाद के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8, धारा 11 और धारा 120 बी के तहत दर्ज हुआ था, जिसकी जांच जारी है।
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