नई दिल्ली
जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने भारत की दो दिवसीय यात्रा के दौरान भारतीय इंजीनियर्स को बड़ा ऑफर दिया है। भारत दौरे के समापन के दौरान उन्होंने देश के आईटी एक्सपर्ट्स और अन्य कुशल लोगों से जर्मनी में काम करने पर विचार करने का आग्रह किया है। जर्मनी के चांसलर ने भारतीय आईटी एक्सपर्ट्स के लिए ये घोषणा उस वक्त की है, जब अमेरिका बार बार भारतीय इंजीनियर्स का लोहा मान रहा है।
जर्मन चांसलर ने क्या कहा?
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल जर्मनी लगातार आईटी विशेषज्ञों और विशेषज्ञ कामगारों की कमी से जूझ रहा है और भारतीय युवाओं को लेकर काफी उत्सुक है। लिहाजा, जर्मन चांसलर ने कहा, कि उनकी गठबंधन सरकार आव्रजन बाधाओं को कम करने की योजना बना रही है, जो उन विशेषज्ञों को भी वीजा देगी, जिनके हाथ में फिलहाल कोई बड़ी नौकरी नहीं है। ओलाफ स्कोल्ज ने इस बात की भी विशेष पेशकश की, कि जर्मनी कितने श्रमिकों को भारत से आकर्षित करने की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा, कि "मुझे पूरा यकीन है, कि कई लोग जर्मनी में कुशल श्रमिकों के रूप में काम करने के अवसरों का लाभ उठाना चाहेंगे।" स्कोल्ज़ ने बैंगलोर में सॉफ्टवेयर कंपनी एसएपी लैब्स इंडिया की यात्रा की और इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं से कहा, कि कुशल कामगारों को जर्मनी में आने का ऑफर देने के लिए उन्होंने कामगारों के साथ एक गोलमेज चर्चा की है।
भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूती
जर्मनी चांसलर ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, कि "हमें रोजगार के सभी क्षेत्रों में कुशल कामगारों की जरूरत है, लेकिन निश्चित रूप से जब कौशल की बात आती है, जैसे कि हमने आज सॉफ्टवेयर और आईटी विकास के क्षेत्र में देखा है, तो हमें कुशल आईटी विशेषज्ञों की जरूरत है।" आपको बता दें, कि जर्मन नेता की भारत यात्रा का उद्देश्य आर्थिक संबंधों को गहरा करना था, और इसके साथ ही यूक्रेन में पीएम मोदी के साथ रूस के युद्ध पर चर्चा करना था। भारत इस साल सितंबर महीने में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, लिहाजा अलग अलग देशों के राष्ट्रध्यक्ष भारत का दौरा कर रहे हैं और जी20 पर बातचीत कर रहे हैं। जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान उनके साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था और उन्होंने कहा, कि ट्रेड और इन्वेस्टमेंट में समझौतों के लिए वो खुद यूरोपीय संघ और भारत के बीच की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कोशिश करेंगे।
रक्षा संबंध को भी मजबूत बनाने पर जोर
आपको बता दें, कि भारत और जर्मनी के संबंध काफी अच्छे रहे हैं, लेकिन कुछ वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तालमेल की कमी भी देखी गई है। लिहाजा, नई दिल्ली में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रक्षा सहयोग पर भी चर्चा की, जिसमें भारत में छह पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए एक संभावित संयुक्त उद्यम बनाने भारत के समुद्री बलों को आधुनिक बनाने में मदद करने का भी जर्मनी ने आश्वासन दिया है। वहीं, SAP लैब के कर्मचारियों के साथ बैठक के दौरान जर्मन चांसलर ने कहा, कि वो भारतीय कामगारों के आव्रजन के लिए नौकरशाही बाधाओं को दूर करने की दिशा में खुद काम करेंगे, ताकि भारतीय विशेषज्ञों के लिए जर्मनी में अपने परिवार के साथ आना और नौकरी करना काफी आसान और सरल बनाया जा सके।
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