तेलंगाना में गुटबाजी से परेशान भाजपा आलाकमान, नाराज शाह ने दी कड़ी हिदायत

राजनीती

नई दिल्ली
 दक्षिण भारत में कर्नाटक के बाद तेलंगाना दूसरा ऐसा राज्य है जहां भाजपा को पूरी तरीके से कमल खिलने का भरोसा है इसलिए भाजपा आलाकमान पूरी ताकत के साथ इस वर्ष के अंत में होने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसे लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में तेलंगाना प्रदेश के नेताओं और चुनाव अभियान से जुड़े राष्ट्रीय नेताओं के साथ बड़ी बैठक कर राज्य में पार्टी को मजबूत करने का खाका भी तैयार किया।

मंगलवार को जेपी नड्डा के आवास पर अमित शाह की मौजूदगी में हुई बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष, तेलंगाना में पार्टी के कामकाज की निगरानी एवं समन्वय करने वाले राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल, प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग, प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी, डीके अरुणा, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. लक्ष्मण सहित कई अन्य नेता मौजूद रहे।

सूत्रों के मुताबिक, तेलंगाना के भाजपा नेताओं की बैठक में अमित शाह ने राज्य भाजपा संगठन में जारी गुटबाजी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को कड़ी हिदायत दी।

सूत्रों की मानें तो शाह ने, प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को आपसी गुटबाजी और विवाद से दूर रहने की हिदायत देते हुए बेहतर समन्वय के जरिए सभी नेताओं को साथ लेकर काम करने को कहा।

बताया जा रहा है इसके साथ ही उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस से भाजपा में आए नेताओं को भी पार्टी के फैसलों और कार्यक्रमों में साथ लेकर चलने के लिए कहा।

भाजपा आलाकमान की तरफ से तेलंगाना के सभी नेताओं को स्पष्ट तौर पर आपसी गुटबाजी खत्म कर राज्य में सामूहिक नेतृत्व में काम करने को कहा गया है। प्रदेश में नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को ज्यादा से ज्यादा समन्वय बैठकें करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि किसी नेता के मन में भी कोई शिकायत या मलाल न रहे।

दरअसल, तेलंगाना में संगठन को मजबूत बनाने के अभियान में जुटी भाजपा दूसरी पार्टियों के नेताओं खासकर सत्ताधारी बीआरएस के मजबूत नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर रही है। लेकिन पार्टी आलाकमान के पास इस तरह की शिकायतें आ रही थी कि बीआरएस से भाजपा में आये नेताओं को प्रदेश संगठन द्वारा ज्यादा तवज्जों नही दी जा रही है। इससे नाराज होकर ही शाह ने मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष को आपसी गुटबाजी खत्म कर, सभी को साथ लेकर सामूहिक नेतृत्व में राजनीतिक लड़ाई लड़ने की नसीहत दी ताकि प्रदेश की केसीआर सरकार को विधान सभा चुनाव में हरा कर सत्ता से बाहर किया जा सके।

 

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