लखनऊ
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आजमगढ़ (Azamgarh) में 219 मदरसे कागजों पर चलाने के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में राज्य विशेष जांच दल (SIT) ने 7 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। जिनमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग (Minorities Welfare Department) के रजिस्ट्रार, तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, लिपिक, वक्फ निरीक्षक, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी धन का गबन, आपराधिक साजिश रचने, सुबूत नष्ट करने के साथ-साथ कई धाराओं में केस दर्ज किया है।
जांच में 219 मदरसे मिले अस्तित्वहीन
मिली जानकारी के मुताबिक, जिले में मदरसा पोर्टल पर अपलोड मदरसों के सत्यापन के दौरान 219 मदरसे अस्तित्वहीन मिले। इनकी जांच कराने पर पता चला कि इन अस्तित्वहीन मदरसों को फर्जी दस्तावेज पर मान्यता दी गई थी। जांच से संबंधित दस्तावेजों को गायब करने और इनको पुरोनिधानित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत भुगतान करके शासकीय धन का गबन किया गया था। इस पर कार्रवाई करते हुए धन का गबन करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों के जांच में दोषी पाए जाने पर शासन को रिपोर्ट सौंपी गई थी।
इन आरोपियों के खिलाफ हुआ मुकदमा दर्ज
SIT की जांच में इस खेल का पर्दाफाश किया गया है। जिसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई तत्कालीन अधिकारी दोषी पाए गए हैं। शासन के निर्देश पर एसआईटी ने आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना आरंभ की है। एसआईटी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के रजिस्ट्रार तत्कालीन जावेद असलम, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी लालमन, अकील अहमद खान व प्रभात कुमार, लिपिक सरफराज, वक्फ निरीक्षक मुन्नर राम, लिपिक वक्त ओम प्रकाश पांडेय व अन्य अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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