नई दिल्ली
"अगले चुनाव से पहले मैं आप सब के साथ यमुना में डुबकी लगाऊंगा।", दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने चुनावी वादे के दौरान ये बात कही थी मगर आलम ये है दिल्ली से हो कर बहने वाली यमुना नदी में झाग ही झाग नजर आता है। कभी कभी तो ऐसा लगता है कि सफेद बर्फ नदी के पानी में तैर रहे हों। यमुना नदी की दयनीय स्थिति पर डिबेट पहले ही जारी है। अब यमुना नदी में प्रदूषण का आलम ये है कि जलीय जीवों का भी यमुना में रहना मुहाल हो गया है। यमुना में प्रदूषण के कारण कतला, रोहू और मिरगला मछली जैसे जलीय जीवों की संख्या में काफी कमी आई है। जल शक्ति मंत्रालय ने यह जानकारी दी संसद में दी है। मगर सवाल ये है कि क्या कभी यमुना नदी साफ हो पाएगी?
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, जल शक्ति राज्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू ने कहा कि केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) को यमुना नदी सहित गंगा नदी बेसिन में प्रमुख भारतीय मछलियों की संख्या को बहाल करने का काम सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि सीआईएफआरआई की तरफ से किए गए रिसर्च के अनुसार, प्रदूषण के कारण यमुना नदी में प्रमुख भारतीय मछलियों जैसे कतला, रोहू और मिरगला की संख्या में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-2022 के दौरान, लगभग 75 लाख छोटी मछलियों को नदियों में छोड़ा गया।
यमुना नदी ने प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले आठ सालों में दिल्ली में यमुना नदी का प्रदूषण दोगुना हो गया है।
यमुना में प्रदूषण के कारण
यमुना नहीं में सबसे ज्यादा प्रदूषण का कारण औद्योगिक प्रदूषण है। दिल्ली में दाखिल होने के साथ-साथ हरियाणा के सोनीपत और पानीपत से औद्योगिक अपशिष्ट नदी में मिलता है। दिल्ली में मौजूद औद्योगिक इकाइयां हैं यमुना के पानी को बहुत हद तक जहरीला बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। यमुना नदी में अमोनिया की 0.2 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) तक की मात्रा को सामान्य माना जाता है। इससे ज्यादा मात्रा होने पर यह स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है।
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