यूपी डीजीपी पद के लिए कौन-कौन रेस में? इन आईपीएस अफसरों की दावेदारी ज्यादा मजबूत

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ

प्रदेश में स्थाई पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। वर्ष 1988 बैच के पांच आईपीएस फिलहाल इस पद की रेस में हैं। वर्तमान में डीजीपी का पदभार संभाल रहे डॉ. डीएस चौहान आगामी 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि स्थाई डीजीपी के तौर पर उनकी नियुक्ति नहीं हो पाती है तो वह इसी माह सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अधिक सेवाकाल के आधार पर डीजी जेल आनंद कुमार व डीजी सीबीसीआईडी विजय कुमार की दावेदारी ज्यादा मजबूत है।

राज्य सरकार ने 11 मई 2022 को मुकुल गोयल को हटा कर डॉ. डीएस चौहान को डीजीपी का भी प्रभार सौंप दिया था। डीजी इंटेलीजेंस व निदेशक विजिलेंस का प्रभार उनके पास पहले से था। उसी समय से वह तीनों पदों का प्रभार संभाल रहे हैं। इस माह सेवानिवृत्ति से पहले यदि उन्हें स्थाई डीजीपी पद पर नियुक्ति मिलती है तो उन्हें सेवाविस्तार मिल सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि स्थाई डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग नई दिल्ली को प्रदेश के वरिष्ठतम आईपीएस अफसरों का पैनल भेजने की तैयारी चल रही है। तय प्रक्रिया के अनुसार आयोग से भेजे जाने वाले तीन नामों में से राज्य सरकार किसी एक को स्थाई डीजीपी नियुक्त कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार इतना तो तय है कि वर्ष 1988 बैच के आईपीएस अफसरों में से ही स्थाई डीजीपी का चयन होगा। इनमें डॉ. डीएस चौहान के अलावा डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा, अनिल कुमार अग्रवाल, आनंद कुमार और विजय कुमार शामिल हैं। डीजीपी पद से हटाए जाने के बाद डीजी नागरिक सुरक्षा के पद पर कार्यरत मुकुल गोयल वर्ष 1987 बैच के अकेले आईपीएस हैं। हालांकि उनका कार्यकाल वर्ष 2024 तक है। वर्ष 1988 बैच के आईपीएस अफसरों में से अनिल कुमार अग्रवाल अप्रैल तथा डॉ. राजकुमार विश्वकर्मा आगामी मई माह में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इस तरह अधिक सेवाकाल के आधार पर आनंद कुमार व विजय कुमार की दावेदारी ज्यादा मजबूत है।

 

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