प्रयागराज
मृतक आश्रित कोटे से बेसिक शिक्षा परिषद के उच्च प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त हुए कर्मचारियों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। यदि ऐसे कर्मचारियों की पढ़ाई-लिखाई ठीक है और उन्होंने उच्च योग्यता हासिल कर रखी है तो सरकार उन्हें चतुर्थ श्रेणी से सीधे शिक्षक बनने का मौका तो देगी ही, मदद भी करेगी। बता दें कि वर्तमान में यूपी के विभिन्न जिलों में परिचारक के पद पर बीटेक, एलएलबी, एमबीए, बीसीए, पीएचडी आदि डिग्रीधारी कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे कर्मचारियों को डीएलएड/बीएड का प्रशिक्षण कराकर उन्हें टीईटी में शामिल होने का मौका मिलेगा जिसके बाद वह शिक्षक पद पर नियुक्त हो सकेंगे।
इसके लिए शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। जिन्होंने नियुक्ति के बाद न्यूनतम अर्हता हासिल की है उन्हें भी इसका लाभ होगा। प्रदेश में 26 जुलाई 2011 को आरटीई लागू होने के बाद से परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक बनने के लिए डीएलएड/बीएड और टीईटी अनिवार्य हो गया। जिन मृतक आश्रितों के पास यह अर्हता थी उन्हें तो शिक्षक पद पर नियुक्ति दे दी गई लेकिन तमाम मृतक आश्रितों को टीईटी अर्हता न होने के कारण चतुर्थ श्रेणी के पद पर ज्वाइन करना पड़ा। बाद में उन्होंने टीईटी पास कर भी लिया तो विभाग ने उन्हें शिक्षक पद पर समायोजित करने से इनकार कर दिया।
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