नई दिल्ली
दुनिया के विकास की गाड़ी इस साल भारत-चीन के डबल इंजन के भरोसे चल रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा कि इस वर्ष वैश्विक विकास में चीन और भारत का योगदान लगभग आधा है। यह दुनिया की अर्थव्यवस्था में एशिया की बढ़ती ताकत को बताता है। वाशिंगटन स्थित आईएमएफ अब एशिया प्रशांत क्षेत्र में विकास की भविष्यवाणी कर रहा है, जो इस साल 4.6% पर आ जाएगा, चीन के फिर से खुलने के कारण पिछले साल 3.8% की तुलना में यह तेज ग्रोथ है। अनुमान यह भी कि इस वर्ष वैश्विक विकास में 70% से अधिक का योगदान इस क्षेत्र द्वारा दिया जाएगा।
आईएमएफ के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने एक ब्लॉग में लिखा, " क्षेत्रीय विकास के लिए सबसे मजबूत स्पिलओवर निवेश वस्तुओं की चीनी मांग से रहा है, लेकिन इस बार हम उम्मीद करते हैं कि सबसे बड़ा स्पिलओवर प्रभाव कंज्यूमर गुड्स की चीन की बढ़ती मांग से होगा।" इस बीच श्रीनिवासन ने यह भी कहा कि एशिया को दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह स्थायी मुद्रास्फीति, लीवरेज और वित्तीय और रियल एस्टेट क्षेत्रों में जोखिम सहित खतरों से सावधान रहने की आवश्यकता होगी। श्रीनिवासन ने कहा, "नीति निर्माताओं को फाइनेंशियल टेंशन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और आकस्मिक योजनाएं विकसित करनी चाहिए।"
आईएमएफ की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने पहले इस बात पर प्रकाश डाला था कि "हमारे पास अब कोई चीन नहीं है, जो बहुत उच्च दर से बढ़ रहा है। समग्र रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए, हमारे पास विकास के बहुत बड़े इंजन नहीं हैं। जब तक हम उत्पादकता नहीं बढ़ाते, हम कम ग्रोथ के साथ संघर्ष करते रहेंगे।" आईएमएफ निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कई झटकों के लिए उल्लेखनीय रूप से लचीली साबित हुई है, लेकिन अभी तक कमजोर विकास और स्थिर मुद्रास्फीति के कांबिनेशन से उबर नहीं पाई है।
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