लखनऊ
यूपी में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ बेटे असद के अंत के बाद अब प्रदेश भर के माफियाओं डर सताने लगा है। इसी हफ्ते माफिया मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी की गाजीपुर एमपी एमएलए कोर्ट में पेशी है। 29 अप्रैल को गाजीपुर एमपी एमएलए कोर्ट में गैंगस्टर एक्ट के तहत फैसला आना है। चर्चा है कि मुख्तार अंसारी को एसी पर आने का डर सता रहा है।
दरअसल यह वही मुख्तार अंसारी है जिस पर साल 2005 में मऊ दंगे का आरोप लगा था। इन दंगों के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार को पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की चुनौती दी थी तो गोरखपुर से मऊ के लिए निकले सीएम योगी को दोहरीघाट पर ही रोक लिया गया था। जिसके बाद योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में एलान करते हुए आजमगढ़ में रैली निकाली। सीएम योगी ने मोर्चा संभाला रैली के लिए गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। योगी को आजमगढ़ में विरोध की आशंका थी इसलिए योगी आदित्यनाथ पहले से ही तैयार थे। आजमगढ़ के करीब पहुंचने पर काफिले में करीब 100 चार पहिया वाहन और सैकड़ों की संख्या में मोटरसाइकिल शामिल हो गई थी। इस बीच एक पत्थर सीएम योगी के गाड़ी पर लगता है। योगी के काफिले पर हमला हो जाता है। हमला पहले से ही सुनियोजित होता है। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा था काफिले पर लगातार एक पक्ष गोलियां चला रहा था। गाड़ियों को तोड़ी पुलिस चुप्पी साधे हुई थी। इस हमले के बाद कुछ लोगों ने मुख्तार अंसारी का हाथ होने का आरोप लगाया था। हालांकि सिर्फ यह आरोप था इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।
इस मामले में होना है फैसला
बता दें कि 22 नवम्बर 2007 को मुहम्दाबाद पुलिस ने भांवरकोल और वाराणसी के मामले के गैंग चार्ट में सांसद अफजाल अंसारी और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को शामिल करते हुते गिरोह बंद अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया था। मामले में सांसद अफजाल अंसारी जमानत पर हैं। वहीं मुख्तार अंसारी बांदा जेल में बंद हैं। इसमें 23 सितंबर 2022 को सांसद एवं मुख्तार अंसारी के विरुद्ध आरोप न्यायालय में प्रथम दृष्टया तय किया गया। अभियोजन की तरफ से एक अप्रैल को गवाही पूरी होने के बाद बहस पूरी हो गई थी।
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