नई दिल्ली
पिछले महीने 20 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पुंछ में आतंकवादियों ने घात लगाकर सेना के ट्रक पर हमला किया था। जिसमें हमारे पांच सैनिक शहीद हो गए थे। अब सुरक्षाबलों ने जम्मू कशमीर में राजमार्गों पर सेना की आवाजाही के लिए रणनीति में बदलाव किया है ताकि घात लगाकर हमला करने वाले आतंकियों को उसी की भाषा में जवाब दिया जा सके। मामले से परिचित अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय कमांडरों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि सैनिकों को एक ही रास्ते पर बार-बार नहीं जाना चाहिए और प्रशासन टीमों के साथ आवाजाही कम होनी चाहिए।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, “हम किसी घटना के बाद या खुफिया सूचनाओं के आधार पर अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करते रहते हैं। सैनिकों से कहा गया है कि वे अपने-अपने शिविरों तक आने या जाने के लिए मार्ग बदलते रहें। प्रशासनिक टीमों के साथ तभी निकलें जब आवश्यक हो।”
राज्य या राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे अधिक संवेदनशील मार्गों, मोड़ों और अन्य स्थानों की पहचान की गई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सेना सहित बलों को तैनाती के संबंध में एक-दूसरे के साथ समन्वय करने के लिए कहा गया है। काफिले की आवाजाही से पहले क्विक एक्शन टीम (QAT) और रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) की संख्या बढ़ानी चाहिए। इसके अलावा, सैनिकों को अपनी आवाजाही को गुप्त रखने और स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच अधिक प्रभावी खुफिया जानकारी साझा करने के लिए कहा गया है।
पुंछ हमले के बाद क्या था इनपुट
पुंछ हमले के बाद, यह जानकारी सामने आई कि क्षेत्र में आतंकवादियों को जानकारी थी कि राजौरी में भीमबेर गली और पुंछ के बीच सेना का ट्रक यात्रा करने वाला है। इस हमले में पांच से सात आतंकवादियों ने तीन तरफ से राइफलों और रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड से गोलीबारी की थी, जिसमें सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे।
पुलवामा अटैक के बाद से बड़ी चिंता
14 फरवरी, 2019 के पुलवामा हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में सेना की आवाजाही एक बड़ी चिंता का विषय रही है, जिसमें एक आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ की एक बस में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (वीबीआईईडी) लगे एक वाहन को टक्कर मार दी थी, जिसमें 40 कर्मियों की मौत हो गई थी।
आवाजाही के दौरान ड्रोन से नजर
अब, घाटी में राजमार्गों पर छोटे काफिले हैं, कई बिंदुओं पर सीसीटीवी लगाए गए हैं, सैनिकों की आवाजाही के दौरान ड्रोन का उपयोग किया जाता है और ऑपरेशनल टीमें अब आमतौर पर उन वाहनों में यात्रा करती हैं जो गोलियों और कम तीव्रता वाले बमों का सामना कर सकते हैं। सुरक्षा बलों के शिविरों और उसके आसपास खड़े वाहनों का नियमित ऑडिट भी होता है।
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