नई दिल्ली
नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर जारी सियासी तकरार अब बहिष्कार तक आ गई है। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP), सीपीएम और सीपीआई ने समारोह से दूरी बनाने का फैसला किया है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि कुछ और विपक्षी दल भी कार्यक्रम से दूरी बना सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस की तरफ से आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। दरअसल, विपक्षी दल 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बजाए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों उद्घाटन की बात कह रहे हैं। दलों का कहना है कि संसद प्रमुख होने के चलते राष्ट्रपति को न्योता दिया जाना चाहिए।
साझा बयान जारी कर सकता है विपक्ष
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि विपक्षी दल समारोह से दूरी बनाने को लेकर साझा बयान भी जारी कर सकते हैं। कांग्रेस भी कार्यक्रम से किनारा कर सकती है। खास बात है कि दिसंबर 2020 में नए संसद भवन के शिलान्यास में भी कांग्रेस समेत कई विपक्ष दल शामिल नहीं हुए थे। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब देश में 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी एकता की कवायद जारी है।
क्या बोली टीएमसी-आप
मंगलवार को ही टीएमसी और आप ने कोलकाता में मुलाकात की। दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र की तरफ से लाए गए अध्यादेश के खिलाफ गैर भाजपा शासित राज्यों के नेताओं से समर्थन की मांग कर रहे हैं। संसद भवन उद्घाटन को लेकर टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, 'संसद केवल एक नया भवन नहीं है। यह पुरानी परंपराओं, मूल्यों, उदाहरणों और नियमों की इमारत है। यह भारतीय लोकतंत्र का आधार है।' उन्होंने आगे कहा, 'पीएम मोदी के यह समझ नहीं आता। उन्हें रविवार को होने वाला उद्घाटन सिर्फ उनके बारे में लगता है। ऐसे में हमें तो अलग ही समझें।' इधर, आप ने इसे राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान बताया है।
भाजपा का पलटवार
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने ताजा मामले को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 24 अक्टूबर 1975 में संसद के एक हिस्से का उद्घाटन किया था। वहीं, पूर्व पीएम राजीव गांधी ने 15 अगस्त 1987 में संसद की लाइब्रेरी की नींव रखी थी।
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