मोबाइल का रेडिएशन बढ़ा रहा थायराइड, रिसर्च में खुलासा, रहें सावधान

उत्तर प्रदेश राज्य

देवरिया
मोबाइल का रेडिएशन थायराइड का मरीज बना रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चूहों पर हुए शोध में यह खुलासा हुआ है। रेडिएशन से न सिर्फ थायराइड का स्तर चार गुना तक बढ़ गया बल्कि ग्लैंड पर भी इसका असर दिखा। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन हेल्थ साइंस में प्रकाशित हुआ है।

यह रिसर्च की है एनाटॉमी विभाग की शिक्षिका रहीं डॉ. शालिनी गुप्ता और फार्माकोलॉजी के शिक्षक डॉ. आरपी यादव ने। डॉ. शालिनी अब देवरिया मेडिकल कालेज में कार्यरत हैं। डॉ. शालिनी ने बताया कि चूहों और मानव शरीर के उत्तक (टीशू ) का व्यवहार एक जैसा होता है। इसी वजह से यह रिसर्च चूहों पर की गई। रिसर्च के लिए 62 स्वस्थ चूहों का चयन कर उन्हें दो समूहों में बांटा गया। इन्हें रखने के लिए मेडिकल कॉलेज के एनिमल हसबेंडरी में स्पेशल सेल बना। सेल के एक हिस्से में कंट्रोल ग्रुप के 31 चूहे रखे गए। प्रयोग वाले ग्रुप के चूहों के बॉक्स के अंदर कीपैड मोबाइल रखा गया। रोजाना तीन घंटे चूहों को मोबाइल फोन का एक्स्पोज़र दिया गया।

ग्लैंड में भी दिखा परिवर्तन

हर महीने 10 चूहों की सर्जरी कर उनके थायराइड ग्लैंड की भी जांच की गई। दूसरे महीने से थायराइड ग्लैंड के अंदर मौजूद कोलायड का आकार तेजी से बढ़ा मिला। कोलायड थायरोक्सिन का स्राव करता है। आकार बढ़ने से शरीर में स्राव अधिक हो रहा था।

दूसरे महीने से दिखा प्रभाव

पहले महीने थायराइड का स्तर सामान्य पाया गया। दूसरे महीने से जांच के परिणाम बदले मिले। दूसरे महीने में टीएसएच में उछाल मिला, जबकि टी-थ्री की मात्रा घट गई। तीसरे महीने में टीएसएच बढ़कर चार गुना तक पहुंच गया। वहीं टी-थ्री की मात्रा आधी रह गई।

 

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