भोपाल
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से गुरुवार को एक बुरी खबर सामने आई, जहां मादा चीता ज्वाला के तीसरे शावक की भी मौत हो गई। अब इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञ विन्सेंट वैन डेर मर्व ने एक चिंताजनक बात कही है। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में चीतों की मृत्युदर में और ज्यादा बढ़ोतरी होगी।
मर्व भारत में चीता प्रोजेक्ट की बारीकी से निगरानी कर रहे। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये आशंका है कि मृत्यु दर पहले वर्ष में 50 प्रतिशत तक हो सकती है। मौत का आंकड़ा इस वजह से भी बढ़ेगा, क्योंकि ये चीते अपना राज स्थापित करने की कोशिश करेंगे। इस दौरान उनका सामना तेंदुए और बाघ से होगा।
उन्होंने ये माना कि बिना बाड़ वाले अभ्यारण्य में चीतों को फिर से बसाना कभी भी सफल नहीं रहा। अफ्रीका में ये 15 बार किया गया और हर बार वो असफल रहे। उन्होंने साफ किया कि वो चीतों को बाड़े में रखने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि वो चाहते हैं कि दो या तीन बाड़ जरूर लगाए जाएं।
उन्होंने मुकुंदरा हिल्स में कम से कम दो से तीन चीते लाने और उन्हें वहां प्रजनन करने की सलाह दी। उनका मानना है कि मुकुंदरा हिल्स पूरी तरह से घिरी हुई है। ऐसे में चीते वहां पर अच्छा करेंगे। हालांकि वहां पर खाने की कमी हो सकती है। ऐसे में अलग से हिरण और चिंकारा लाने होंगे।
उन्होंने ये भी कहा कि जब चीतों को एक-जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है, तो उनकी मौत सामान्य है। खुले इलाके में जाने पर भी उनकी मौत सामान्य है, क्योंकि वो शिकार के लिए एक-दूसरे से लड़ेंगे। उन्होंने कूनो और उसके आसपास तेंदुए-बाघ के होने पर भी चिंता जताई। वहीं अब तक कुल 3 वयस्क चीता और 3 शावकों की मौत हुई है। इस पर मर्व ने कहा कि ये सामान्य बात है। अभी चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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