जयपुर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के एक दिन बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक संकट को हल करने के प्रयास में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ मिलकर काम करेंगे। सोमवार को खड़गे, राहुल गांधी, पार्टी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने गहलोत और पायलट से चार घंटे तक विस्तार से चर्चा की।
गहलोत ने मंगलवार को कहा, अगर वह (पायलट) पार्टी में हैं तो ऐसा (मिलकर काम) क्यों नहीं करेंगे? वह उस सवाल का जवाब दे रहे थे जब उनसे पूछा गया कि क्या वो और पायलट राजस्थान में एक साथ काम करेंगे।
जब और जोर दिया गया तो उन्होंने कहा, कल शाम की बैठक मुद्दों को सुलझाने और राज्य में एक साथ लड़ने के लिए बुलाई गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है। मैं अपने जीवन में तीन बार मुख्यमंत्री रहा हूं और मैं सभी से धैर्य रखने के लिए कहता हूं।
गहलोत ने कहा, और मैं तीन बार मंत्री भी रहा हूं और पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया है। आज यह मेरा कर्तव्य है कि मैं वह काम करूं जो आलाकमान चाहता है कि चुनाव जीतें और वह भूमिका निभाएं जो वे करना चाहते हैं। मेरे पास लोगों के लिए सभी तरह की योजनाएं हैं।
उन्होंने कहा, विश्वास देकर आप भरोसा जीतते हैं। अगर सब मिलकर काम करेंगे तो हमारी सरकार फिर से बनेगी। अगर आप पार्टी के प्रति वफादार रहेंगे तो जैसा कि सोनिया गांधी ने अधिवेशन में कहा था कि धैर्य रखने वाले को एक न एक दिन मौका जरूर मिलता है।
सोमवार की बैठक के बाद वेणुगोपाल ने कहा कि गहलोत और पायलट दोनों राजस्थान में भाजपा को संयुक्त रूप से टक्कर देने पर सहमत हुए हैं।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी जुलाई 2020 से उथल-पुथल की स्थिति में है, जब पायलट ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर विद्रोह कर दिया था।
विद्रोह के बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया। उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से भी हटा दिया गया।
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