अमित शाह के रहते मणिपुर में हिंसा, राहत शिविरों में पीड़ितों से मिलने पहुंचे गृह मंत्री

राजनीती

इंफाल

गृह मंत्री अमित शाह के मणिपुर दौरे का आज तीसरा दिन है। उन्होंने बुधवार को कुकी और मैतेई दोनों ही समुदायों को राहत शिविरों में पीड़ितों से मुलाकात की और उनसे वादा किया कि जल्द ही उन्हें वापस अपने घर लौट पाएंगे। कांगपोकपी और मोरेह में उन्होंने कुकी समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उन्हें  जरूरी सामान उपलब्ध करवाने की बात कही। इसके अलावा इमरजेंसी के लिए हेलिकॉप्टर की सेवा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। हालांकि अमित शाह के राज्य में रहत हुए भी कई पहाड़ी इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आईं। बिश्नुपुर और चुरचांदपुर में गोलीबारी की भी घटनाएं हुईं।

सुरक्षाबलों नें संदिग्ध लोगों की धरपकड़ की कोशिश की तो गोलियां चल गईं। क्रॉसफायरिंग में दो लोग घायल हो गए। अमित शाह ने बुधवार को सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। इसके अलावा वे जो हथियार छीन ले गए हैं, उन्हें जल्दी रिकवर किया जाए। मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने भी लोगों से अपील की है कि असम राइफल्स और अन्य सुरक्षाबलों से छीने हुए हथियार वे वापस कर दें।

शाह ने मोरेह और भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े कांगपोकपी का दौरा किया और कहा कि केंद्र सरकार मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए  हर प्रयास करेगी। उनके पहुंचने को दौरान कुकी और मैतेई  दोनों ही समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया। गृह मंत्री सोमवार को चार दिन के दौरे पर मणिपुर पहुंचे थे। उन्होंने सबसे पहले मैतेई और कुकी समुदाय की महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इसके अलावा ट्राइबल काउंसिल, कुकी चीफ असोसिएशन, तमिल संगम, गोरखा समाज और मणिपुर मुस्लिम काउंसिल के लोगों से उन्होंने मुलाकात की।

हिंसा प्रभावित कांगपोकपी में सैकड़ों की संख्या में कुकी आदिवासियों ने तिरंगा हाथ में लेकर उनका स्वागत किया। हालांकि उनके इस दौरे में सीएम बिरेन सिंह शामिल नहीं थे जो कि खुद मैतेई समुदाय से आते हैं। सीआरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव सिंह और एक आईपीएस अधिकारी को मणिपुर पहुंचने को कहा गया है। माना जा रहा है कि मणिपुर पुलिस में उन्हें कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है।

मैतेई ग्रामीणों ने केंद्र और स्थानीय नेताओं को चेतावनी दी है कि प्रशासन हिंसा को रोकने में नाकामयाब होगा तो कुकी लोगों के खिलाफ वे सिविल डिफेंस फोर्स बनाएंगे। एक गांव के मुखिया ने कहा कि यह फैसला कानूनी तौर पर भी सही है और सरकार के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, हम सरकार की शांति स्थापित करने में हर तरह की मदद करेंगे।

 

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